एक अनोखा रिवाज 😀
एक अनोखा रिवाज 😀
सोसाइटी में मूर्ति स्थापना का उत्सव चल रहा था, तीन दिवसीय कार्यक्रम था, कार्यक्रम के अंत में भोजन का आयोजन रखा गया, लोक अनुशासित तरीके से कतार में चल रहे थे , भोजन लेने के पश्चात अंत स्टोल पानी का था।
दूर खड़ा भला आदमी देख रहा था, लोगों को पानी की बोतल देने से पहले बड़ी प्यार से उनका नाम पूछा जा रहा था नाम को बोतल रजिस्टर में नोट किया जा रहा था और एक सुंदर सा तिलक। भले आदमी को रहा नहीं गया, आकर बोल ही दिया।भाई ये आपका बहुत सुंदर रिवाज है है।
सामने वाला शक्स बोला अरे यह कोई रिवाज नहीं है निशानी के रूप है है, ताकि लोग दो बारा ना आए।
