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Rajnishree Bedi

Drama

3  

Rajnishree Bedi

Drama

देशभक्ति

देशभक्ति

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करवाचौथ का त्यौहार,हर तरफ रँग बिरंगी साड़ियों और चूड़ियों की दुकानें सजी हुई ऐसी लग रही थी थी,जैसे नई नवेली दुल्हन अपने पिया के इंतज़ार में खड़ी हो।

सच ही तो थाउन्हें ग्राहक का इंतज़ार था और मुझेमेरे पिया का।

जो सरहद पर डटे थे,देश की रक्षा के लिये।

न भूख की परवाह,न मौसम का डर।इनसे तो जैसे इन्होंने दोस्ती करली थी।खुशमिज़ाज़ ,बेखौफ हर वक़्त जान हथेली पर रखकर गिद्ध सी पैनी निग़ाहें रखतेकी दुश्मन तो क्या पंछी भी उड़ न सके ।जांबाज़ वीरों की तरह वन्देमातरम वन्देमातरम का नारा बोलते ।दिन रात देश सेवा के लिए लगे रहते।

करवाचौथ का व्रत आ गया।इनके नाम की मेहँदी लगाए,आँखों मे इनके आने का इंतज़ार और इंतज़ार उसे भी जो मेरी कोख में पल रहा था।उस वीर का अंश जिसके रग रग में हिंदुस्तान था।

वो भी अपने निडर देशभक्त पिता से मिलने को आतुर था।

अपने पति से बात करने की खातिर काफी बार मैने फोन मिलाया।लेकिन फोन नहीं मिल रहा था और आने में भी देरी हो गयी थी।

आँखे बार-बार दरवाज़े पर जा कर खाली ही लौट रही थी। चाँद निकल आया:- बाहर आ जाओ।पड़ोसनों की आवाज़ से मैं अपनी सोच से बाहर निकली।

बाहर निकलने ही लगी थी कि फोन की घण्टी बजी।

माँ ने फोन उठाया और बात करने लगी। क्या ये क्या बोल रहे है ? वो तो आज आने वाला था न।

तेज़ तेज़ रोने की आवाज़ों से मैं किसी अनहोनी से कांप उठी।

"नही रहा मेरा वीर बेटा, दुश्मन को मार गिराते ,वो भी शहीद हो गया"।

ये सच सुनते ही मेरी आँखों के आगे अंधेरा छा गया।मैं पत्थर सी हो एक कोने में बैठ गयी।

तभी अचानक प्रसवपीड़ा शुरू हो गयी और मैं आनन-फानन में अस्पताल पहुंचा दी गई।

एक शहीद के वीर बेटे ने जन्म लिया ।अपने पिता के अधूरे काम को पूरा करने के लिए।

अब ये दुश्मन के छक्के छुड़ाएगा।उतारेगा सीने में गोली, जो मेरे पति के हत्यारे थे।लेगा हर उस बेइज़्ज़ती का हिसाब,जो दुश्मन ने देश की करी।

"इधर नवजात वीर घर आया और दूसरी और तिरंगे में लिपट कर आया हिंदुस्तान के वीर बेटे का शव।

जिसे देख हर हिंदुस्तानी रोया।

नवजात बच्चे के नन्हे नन्हे हाथों से सलामी दिलवा, सारे हिंदुस्तान से भावभीनी विदाई ले गया एक वीर पुत्र और दे गया एक और सिपाही सरहद के लिए, देश के लिए।


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