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विनीता धीमान

Drama

3  

विनीता धीमान

Drama

देखो वही हुआ

देखो वही हुआ

2 mins
340

शाम के पांच बजे छवि चाय बना रही है। सासू जी ने कोई दाल सब्जी नही निकाली है। उनकी आदत है, जो बनाना हो निकाल कर रख देती है, अपनी पसंद से।

ऐसा करते हुए उन्हें काफी समय हो गया है। 

छवि ने पूछा कि क्या बनाना है ? तो बोली जो है बना लो। मूड खराब है मेरा। तुम जाओ यहाँ से। छवि चुपचाप चल पड़ी पता है मम्मी जी से सवाल जवाब का मतलब है कि आ बैल मुझे मार लेकिन छवि इस उधेड़बुन में हूं कि मुझसे क्या भूल हो गई है। सोच रही हूं कि अकेली बहू होने के नुकसान ज्यादा है। 

सास की नजर आप पर ही टिकी रहती है ? आप क्या कर रहे हो, उठने, बैठने, आपने क्या पहना यहां तक कि क्या खाया, कब सोई, कब उठी सबकी जानकारी आपकी सास को अच्छे से होती हैं। 

अपने पूरे दिन को रिवाइज किया। अपनी अक्ल के घोड़े दौड़ाने के बाद भी कुछ याद नही आ रहा था कि आज उसने ऐसा क्या किया जिसकी वजह से इनका मूड खराब हैं। लेकिन ऐसा कुछ हुआ तो नहीं। चलो कोई बात नहीं खाना बना दिया गया।  

छवि अपने बच्चों के साथ खेल रही थी कि तभी रसोई में बर्तन गिरने की आवाज़ आई। भाग कर गई देखा तो सासू जी देख रही है... क्या बनाया है?? आज फिर मूंग की दाल बना दी। कौन खाएगा इसे, इतनी सारी क्यू बनाई है। तुम्हे कोई अंदाजा भी है कि कितनी महंगी हो गई है दाले।

चावल भी कितने बना के रख दिए हैं। हम लोग नहीं खाएंगे बेकार जायेंगे तुम्हे कितनी बार कहा है, कि कम बनाया करो। कोई धर्मशाला या मंदिर नहीं है यह मेरा घर हैं। यहां सब मेरे हिसाब से चलता है।

लेकिन तुम्हारे कानों पर तो जूं तक नहीं रेंगती। तुम्हे कोई फर्क नहीं पड़ता। अब खड़ी खड़ी क्या सुन रही हो। जा अपना काम कर। जब देखो बच्चों के साथ हा हा ही ही करती रहती हैं।

छवि चुपचाप खड़ी सुनती रही। कुछ कहना बेकार है। उन्होंने सुनना तो है नहीं, उनको समझाना बेकार है। करनी उन्होंने अपने मन की है छवि जाती है बिना कुछ बोले लेकिन सोच रही हैं।

माना घर उनका है, मैं तो कभी भी इस घर की ना बन पाई, कितनी भी कोशिश कर लू, कुछ कमी रह ही जाती हैं। सबको खुश रखने के चक्कर में अपना भी खयाल भी नहीं रख पाती, मम्मी जी से पुछो तब बुरे बनो न पूछो तो और भी सुनने को मिलता है छवि की हालत देखो वही है आ बैल मुझे मार। 


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