चटोरी एक्सप्रेस!
चटोरी एक्सप्रेस!
स्टेशन पर अफरा-तफरी का माहौल था। "लकी, तूने कहा था कि हम जल्दी पहुँचेंगे, अब ये सामान कौन उठाएगा?" आर्यन ने हांफते हुए कहा, उसके दोनों कंधों पर दो बड़े बैग और एक हाथ में रिया का हैंडबैग था। लकी, जिसके पास खुद एक छोटा-सा बैग था, अपना कॉलर सेट करते हुए बोला, "अरे यार, जल्दी में ही तो मज़ा है। और वैसे भी, मैंने सब कुछ 'जीनियस' प्लानिंग से मैनेज किया है।" समीक्षा ने अपनी आँखों पर चश्मा ठीक करते हुए लॉजिक दिया, "तेरी जीनियस प्लानिंग का ही नतीजा है कि हमारी ट्रेन 5 मिनट में छूटने वाली है और हम अभी भी एंट्री गेट पर हैं।" तभी बबलू, एक हाथ में चिप्स का पैकेट और दूसरे हाथ में समोसे की थैली लिए, पीछे से दौड़ता हुआ आया, "अरे रुको! उस दुकान के परांठे बहुत फेमस हैं, मैंने सोचा थोड़ा पैक करवा लूं।" "बबलू! तू कभी खाना नहीं छोड़ेगा?" रिया ने अपनी 'आई-रोल' करते हुए कहा। खैर, जैसे-तैसे सब ट्रेन में चढ़े और अपनी-अपनी सीटों की तलाश शुरू हुई। लकी की 'जीनियस' प्लानिंग का पहला झटका तब लगा जब पता चला कि उनकी पाँचों सीटें एक साथ नहीं थीं। "लकी! ये क्या है? सब अलग-अलग?" समीक्षा चिल्लाई। लकी ने अपनी 'मैं क्या करूँ' वाली मुस्कान दी और कहा, "अरे, अलग-अलग बैठने में ही तो प्राइवेसी है।" शुरुआत हुई सीट बदलने के ड्रामे से। आर्यन और रिया एक साथ बैठना चाहते थे, लेकिन उनके पास एक बुज़ुर्ग अंकल बैठे थे जो सिर्फ अपने 'पुराने ज़माने' के किस्से सुनाने में लगे थे। बबलू को एक कोने की सीट मिली थी, जहाँ से उसे खाना बेचने वाले आसानी से दिख रहे थे। समीक्षा को दो ऐसी महिलाओं के पास सीट मिली थी जो पूरे टाइम अपने सास-बहू के झगड़ों पर बहस कर रही थीं। और लकी? लकी को बाथरूम के पास वाली सीट मिली थी। जैसे ही ट्रेन शुरू हुई, असली मज़ा भी शुरू हुआ। ट्रेन में सफर का मतलब था - खाना, खाना और बस खाना। बबलू के पास खाने का खजाना था। चिप्स, समोसे, नमकीन, मिठाई... सब कुछ। "अरे, अगला स्टेशन आने वाला है। वहाँ की कचौरी बहुत फेमस है!" बबलू ने चिल्लाकर सबको इन्फॉर्म किया। "अरे बबलू, अभी तो तूने दो परांठे और आधा किलो नमकीन खाया है!" आर्यन ने हैरान होकर कहा। रिया ने अपना फोन निकाला और व्लॉग रिकॉर्ड करना शुरू किया, "हे गाइज़! हम हैं 'फूड एक्सप्रेस' पर और हमारे पास है हमारा खुद का 'फूड किंग' - बबलू!" ट्रेन में हर स्टेशन पर कुछ न कुछ खरीदा जाता। कचौरी, पेड़े, चाय... सबकी एक-एक प्लेट। "अरे लकी, तूने तो कुछ खाया ही नहीं?" समीक्षा ने पूछा। लकी, जो बाथरूम के पास वाली सीट पर बैठकर परेशान हो रहा था, बोला, "अरे, मैं 'हेल्थ कॉन्शियस' हूँ। मुझे सिर्फ घर का बना खाना ही पसंद है।" तभी बबलू ने अपना बैग खोला और एक डब्बा निकाला, "ये ले! मेरी मम्मी ने स्पेशल तेरे लिए 'बेसन के लड्डू' भेजे हैं।" लकी की आँखों में जैसे चमक आ गई। खाने की मस्ती के बीच लकी ने अपनी एक और 'जीनियस' हरकत कर दी। वो बाथरूम गया और बाहर आते समय गलती से दूसरे डब्बे के बाथरूम में चला गया। आधे घंटे तक वो अपनी सीट पर नहीं लौटा। आर्यन उसे ढूँढने गया और उसे दूसरे डब्बे में एक छोटे बच्चे के साथ 'लूडो' खेलते हुए पाया। शाम को, जब सब थोड़े थक गए थे, बबलू ने अपनी आखिरी चाल चली। उसने अपना बैग खोला और एक बड़ा-सा डिब्बा निकाला। "ये क्या है बबलू?" समीक्षा ने पूछा। "ये है... 'मटका बिरयानी'!" बबलू ने गर्व से कहा। बिरयानी की खुशबू ने पूरे डब्बे को महका दिया। आसपास के यात्री भी बबलू के बैग की तरफ देखने लगे। पाँचों बिरयानी की प्रतियोगिता में जुट गए। किसने सबसे ज़्यादा बिरयानी खाई? समीक्षा ने अपनी बिरयानी को 'सिर्फ टेस्ट' किया, जबकि आर्यन और रिया ने मिलकर आधी बिरयानी खत्म कर दी। लकी ने भी दो प्लेट बिरयानी खाई, अपनी 'हेल्थ कॉन्शियस' इमेज को भूलकर। और बबलू? उसने बिरयानी खाने का नया रिकॉर्ड बना दिया। रात हो गई। सब अपनी-अपनी सीटों पर थककर सो गए। सुबह हुई, ट्रेन अपने गंतव्य पर पहुँची। पाँचों दोस्त ट्रेन से उतरे, थके हुए लेकिन खुश। "वाह! क्या सफर था!" आर्यन ने कहा। रिया ने अपना व्लॉग खत्म किया, "सो गाइज़! ये था हमारा 'फूड एंड फन' ट्रेन एडवेंचर। अगला स्टेशन कौन-सा है? पता नहीं, लेकिन वहाँ का खाना पक्का टेस्टी होगा!" और बबलू? वो अभी भी रेलवे स्टेशन पर एक दुकान की तरफ इशारा कर रहा था, "अरे! उस दुकान के छोले-भटूरे बहुत फेमस हैं..."
