Srishti Shukla

Abstract Others


4.3  

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छोटे शहर की लड़की

छोटे शहर की लड़की

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मैं रिहाना एक छोटे से शहर की सीधी साधी लड़की जाने क्या-क्या अरमान लेकर एक बड़ी सी शहर दिल्ली में आई बहुत कुछ खोया पर उससे भी ज्यादा बहुत कुछ पा लिया हसरतें थी।

अरमान थे पर कुछ कमी सी तो थी सोचा जिंदगी में सब को सब कुछ नहीं मिलता सबसे हंसते गाते खूब प्यार से मिला करती थी।  

लोगों ने स्वभाव का बहुत फायदा उठाया सोचा क्यों ना आपको भी अपनी उस दुनिया में ले चले जहां कहने को तो सब कुछ है पर खोने को कुछ भी नहीं  दिखावा झूठ धोखा और हम जैसे छोटे शहर की लड़कियों के लिए सब कुछ एक छलावा सा ही तो है !


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