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Gautam Sagar

Drama


2.6  

Gautam Sagar

Drama


चाँद , रात और वे दोनों

चाँद , रात और वे दोनों

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आज फागुन की बड़ी भी नशीली रात थी। चंद्रमा गगन से प्रेम और रति की सुधा बरसा रहा था। चाँद मितेन और करीना के बेड रूम के बड़े से विंडों पर रुका हुआ था।

आज सुबह से ही दोनों के झगड़े कुछ ज्यादा ही बढ़ गए। रोज रोज के झगडों का टॉपिक लिस्ट कुछ इस प्रकार की थी।

· आज फिर देर से क्या आए और दो – दो बार फोन किया मगर हमेशा नेटवर्क से बाहर।

· आप फिर वहीं सब्जी क्यों बनाई।

· तुमने मुझे विवाह के इतने साल हो गए अपने मन की गहने तक नहीं बनवाए।

· ऑफिस से थका आया हूँ और तुम अब भी मोबाइल पर लगी हो।

· देखो ! यह घर का सारा काम मुझसे नहीं होता।

· तुम भी तो संजना के स्कूल में पैरेंट मीटिंग को जा सकती थी

· देखो अब तुम मेरे मायके मत पहुँचो

· देखो अब तुम मेरे बहन के बारे में अपना विष मत उगलो

· जाओ ...हर दिन तुमसे क्या बहस करूँ

· काम की बात तुम्हें बहस लगती है।

· मेरे हॉबी में तुम टांग मत अड़ाओ। क्या पति और बच्चों के बाहर मेरी क्यों कोई दुनिया नहीं।

· अरे यार –दोस्तों में दो चार महीने में एकाध बार पी ली तो कौन सा गुनाह कर दिया कि आँख दिखा रही हो?

· आज 14 वर्ष हो गए शादी के आज भी तुम को मेरी पसंद-नापसंद के बारे में कुछ पता नहीं।

आज दोनों में झगड़े रात को ही शुरू हो गए। मितेन अपने लैप टॉप पर कुछ जरूरी प्रोजेक्ट में व्यस्त था। करीब 1 बजे वह बेड पर आया। सिर भारी था। वह बगल में सोई करीना के बदन को प्यार से टच करने लगा।

आवाज आई , “ ऊह ! नींद खराब मत करो।“

“बहुत दिन हो गए प्लीज़!”

“नो ... मुझे मन नहीं है”

ऐसा कैसे मन नहीं है । जब तुम्हारे पास प्यार के लिए आता हूँ , बोल देती हो मन नहीं है।“

“मुझे सोने दो।“

प्लीज ... कितने दिन से तुम्हें डिस्टर्ब किया क्या क्योंकि हर दिन कुछ ना कुछ झगड़ा होता रहता हैं।

“मैं क्या केवल सेक्स की वस्तु हूँ, प्यार तो करना जानते नहीं”

“क्या कहा । मैं प्यार नहीं करता। केवल वासना के लिए तुम्हारे पास आता हूँ। देखो तुम अब ठंडी होती जा रही हो , हमेशा ना नुकुर करती हो।"

“क्या कहा मुझमें कमी है। अपनी कमी छुपाने के लिए मुझमें कमी बता रहे हो। मुझे पता नहीं क्या कौन-कौन सी दवा इन दिनों तुम खाते हो।“

“उससे क्या ? वह तो एक उम्र के बाद हर मर्द इस तरह के सप्लेमेंट खाता हैं।“

करीना हंस दी ।

करीना की हंसी मितेश को चुभ गई।

“ तुम कहना क्या चाहती हो कि मेरे में अब वो ताक़त नहीं रही। “

करीना दोबारा हंस दी।

मितेश :- “तुमने ही मुझे ऐसा बनाया है। हर बार मैं ही पहल करूँ । हर बार मैं ही तुम्हें सुख दूँ। कभी तुमने कहा चलो आज दोनों लिपटकर सोते हैं ।कुछ फंटसी रचते हैं। पहली बार जैसा किस को जिंदा करते हैं। हर बार इतना मान –मनौवल करते करते आदमी का मूड क्या रहेगा।“

“क्यों औरत के बारे में अभी तक नहीं जानते हो” - करीना ने चुभती बात कही।

“सब जानता हूँ। प्यार दोनों तरफ से होता हैं । तुम हर समय मेरी कमियों के पीछे ही पड़ी रहती हो। कभी मेरे फैशन सैन्स पर नाराजगी , कभी मेरे दोस्तों से नाराजगी , कभी मेरे घरवाले पसंद नहीं । बेड पर भी यही सब बातें होगी तो बताओ ... कैसे मेरे अंदर की ऊर्जा जागेगी.”

करीना बोली , “ देखो यह सब बहस वाले टॉपिक तुम छेड़ते हो । और मैं क्यों पहल करूँ । तुम मुझे प्यार करो , कहते थे रानी की तरह रखूँगा , भूल गए। “

इस तरह दोनों में दो घंटे उस सुहानी चाँदनी रात में तकरार चलती रही। बातें अब ज्यादा पर्सनल हो गईं । दोनों ने सुहाग रात से लेकर आज की रात तक के बेडरूम वाले प्रेम पर शिकायती भड़ास निकालने लगे।

खिड़की से झाँकता चाँद हारसिंगार के पेड़ की ओट में चला गया कि यहाँ केवल शिकायतें है । वह किसी प्यार वाले दरीचे की की तरफ बढ़ गया।



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