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Prabodh Govil

Drama

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Prabodh Govil

Drama

बसंती की बसंत पंचमी- 30

बसंती की बसंत पंचमी- 30

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श्रीमती कुनकुनवाला अब बेटे की बात सुनने के लिए उसे एक कुर्सी पर बैठा कर ख़ुद उसके सामने आ बैठी। लेकिन अभी बेटे ने मुंह खोला भी न था कि दरवाज़े की घंटी बजी और देखते देखते धड़धड़ाते हुए एक के बाद एक जॉन के सब मित्र चले आए। जिस पार्टी के लिए कुर्सियां जमा कर जॉन इंतजार कर रहा था उसकी गहमा गहमी शुरू हो गई। उसकी मम्मी, श्रीमती कुनकुनवाला उन सब के अभिवादन का जवाब देती हुई रसोई में चली गईं।

वैसे रसोई में उनके करने के लिए कोई ख़ास काम नहीं था क्योंकि जॉन ने पार्टी के लिए सभी चीज़ें ऑनलाइन ऑर्डर करके ही मंगा रखी थीं।

श्रीमती कुनकुनवाला को ये देख कर अचंभा ज़रूर हो रहा था कि पार्टी में जॉन के दोस्तों में लड़कियां ज़्यादा थीं। सब बच्चे बेतहाशा हंसे जा रहे थे। उनसे न रहा गया, वे भी बच्चों के पास ही आ बैठी।

श्रीमती कुनकुनवाला ने बच्चों की पूरी कहानी सुन कर तो जैसे दांतों तले अंगुलि ही दबा ली।

अविश्वसनीय! कोई यकीन नहीं करेगा इस बात पर, लेकिन ये पूरी कहानी जॉन की एक फ्रेंड उस लड़की ने ही उन्हें सुनाई जो खुद ये सब करामात कर के आई थी। और अब जाकर श्रीमती कुनकुनवाला को भी उन रुपयों का रहस्य पता चला जो उनका बेटा जॉन उन्हें दिखाता हुआ लिए घूम रहा था।

असल में जॉन के एक दोस्त के पापा शहर के एडीएम थे। अर्थात अतिरिक्त जिला कलक्टर।

पिछले साल मार्च महीने में शहर में लॉकडाउन लगने की बात उन्हीं से बच्चों को पहले से मालूम पड़ गई। उन्हें दो सप्ताह पहले ही ये भी पता चल गया कि शहर में कर्फ्यू लगने वाला है फ़िर सभी काम करने वाले लोग, अख़बार वाला, दूध वाला, घरेलू नौकर, बाई आदि भी आसानी से आ जा नहीं सकेंगे। उधर मचे हड़कंप के कारण घरेलू बाई नौकर आदि काम छोड़ कर गांवों में पलायन करने लगे।

जॉन और उसके दोस्तों को ऐसे में एक शरारत सूझी !



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