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Dinesh Dubey

Classics

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Dinesh Dubey

Classics

बंगाली बाबा और श्री बिहारी

बंगाली बाबा और श्री बिहारी

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एक बार कलकत्ता से एक बूढ़े बंगाली ब्राह्मण श्री बिहारी जी के दर्शन के लिए वृंदावन आये तो प्रभु के दर्शन के पश्चात उन्हे इतना आनद आया की वो वहीं के हो गए।

उन्होंने मंदिर के स्वामी जी से सेवा मांगी तो स्वामी जी ने कहा - बाबा! इस उम्र में आप क्या सेवा कर पाओगे?

बंगाली बाबा ने बहुत विनती की तो स्वामी जी ने श्री बिहारी जी की चौखट पर रात की चौकीदारी की सेवा लगा दी और कहा *"बाबा! आपको यह ध्यान रखना है कि कोई चोर चकुटा मंदिर में प्रवेश न कर पाए।

बंगाली बाबा ने बड़े प्रेम भाव से सेवा बिहारी जी की सेवा स्वीकार की।

कई वर्ष बीत गये बिहारी जी की सद्भावना से सेवा करते हुए।

एक बार बंगाली बाबा की रात्रि में निंद खुली तो वह देखते हैं कि बिहारी जी आधी रात को चल दिये सेवाकुंज की ओर, यह देख बंगाली बाबा भी चल दिए उनके पीछे पीछे!

सेवाकुंज के पास पहुंचने पर बिहारी जी थक गए। उन्होंने पीछे मुड़कर देखा तो बंगाली बाबा भी उनके पीछे थे।

उन्होंने बंगाली बाबा से कहा ,*" बाबा मैं बहुत थक गया हूँ आप मुझे सेवाकुंज तक तो पहुंचा दो ना ।

बंगाली बाबा प्रसन्न हो श्री बांके बिहारी जी को अपने कंधों पर बैठाकर सेवाकुंज की चौखट पर ले गए।

प्रभु ने बंगाली बाबा से कहा *" मुझे यहीं उतार दो और यहीं रुककर मेरे आने की रह देखो ।

बंगाली बाबा के मन में विचार आया कि *"प्रभु इतनी रात में सेवाकुंज में क्या करने आयें हैं?

यह जानने की इच्छा से उन्होंने आले से झांक कर देखा तो उन्हें दिव्य प्रकाश नज़र आया।

उस प्रकाश में उन्होंने श्री बिहारी जी को श्री राधा जी संग रास करते हुए देखा। बंगाली बाबा की हालत पागलों जैसी हो गई और वहीं गिर कर बेहोश हो गए।

सुबह बिहारी जी ने बंगाली बाबा को देखा और मुस्करा कर उन्हे पुकारा और बंगाली बाबा से कहा *" बाबा! मुझे मंदिर तक नहीं ले जाओगे।

बंगाली बाबा ने बिहारी जी को सुबह चार बजे मंदिर में पहुंचाया और स्वामी जी से सारा वृत्तांत कह सुनाया ।

स्वामी जी मंगला आरती के लिए बिहारी जी को उठाने लगे तो बंगाली बाबा ने उनके पांव पकड़ लिये और कहने लगे *" महाराज ! क्या कर रहे हो, मेरे गोविन्द अभी अभी तो सोयें हैं!

स्वामी जी चुप हो उन्हे देखते रह गए।

लोग कहते हैं कि उसी दिन से साल में जन्माष्टमी को छोड़कर कभी भी श्री बांके बिहारी जी की मंगला आरती नहीं हुई, और उसी दिन ही श्री बिहारी जी ने उस बंगाली बाबा को अपने सेवाधाम में ही हमेशा के लिए बुला लिया..!!



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