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Rajesh Singh

Classics Inspirational


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Rajesh Singh

Classics Inspirational


बंद दरवाजे पर दस्तक

बंद दरवाजे पर दस्तक

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बंद दरवाजे पर कहीं किसी ने दि दस्तक,

या कहीं मेरा कोई वहम तो नहीं है ?

बंद दरवाजे पर कहीं किसी ने दी दस्तक,

कहीं कोई अपना तो नहीं है।

कहीं अपना मुन्ना पगार लिए खड़ा तो नहीं ?


कहीं बंद दरवाजों के पीछे रात भर तू खड़ा तो नहीं ?

यह बिल्ली ने कैसा रास्ता काटा है ?

कहीं कुछ अंदेशा सा छाया है

यह कैसी बिजली कड़क रही ?

यह बादल कैसे गरज रहे ?

यह कैसी सनसनाहट छाई है ?


यह कैसी रुसवाई है ?

बंद दरवाजे पर किसी ने दी दस्तक,

कहीं कोई अपना तो नहीं ?

कहीं प्रिया ससुराल से तो नहीं आई ?

कहीं कोई उस पर कोई विपदा तो नहीं छाई ?


यह दरवाजे पर कैसी आहट है ?

मेरे दिल में कैसी हलचल है ?

यह मन क्यों है घबरा रहा ?

ये मौसम क्यू चकरा रहा ?

यह कैसी है आपाधापी है ?

लगता शहर दुर्घटना व्यापी है,


बंद दरवाजे पर किसी ने दी दस्तक,

या मेरा कोई भरम तो नही है ?

खेत खलिहान ठीक तो है ?

गईया बछिया ठीक तो है ?

यह हवा में कैसी सरसराहट ?

यह कैसी ठहरी आफत है ?


कहीं चिंटू की तबीयत ठीक तो नहीं ?

कहीं कोई दुर्घटनाग्रस्त तो नहीं ?

यह कैसी सनसनाहट छाई है ?

दरवाजे पर कोई अंदेशा खींच लाई है,

बंद दरवाजे पर दे रहा कोई दस्तक,

कहीं कोई अपना तो नहीं ?


ये किवाड़ जाने कुछ बोल रहे,

जाने अशुभ है कुछ बोल रहे ?

यह चश्मे कैसे टूट से गए ?

मेरे पैर क्यू उठ नहीं रहे,

यह कैसी लाचारी है ?

कैसी परेशानी आई है ?


बंद दरवाजे पर दे रहा कोई दस्तक,

कहीं कोई अपना तो नहीं।


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