बंद दरवाज़ा
बंद दरवाज़ा
अरी! ओ कमला! बाहर ये शोर कैसा मचा है ? शकुन्तला देवी ने नीचे आकर अपनी नौकरानी से पूछा__
वो मां जी! आपके घर पोती ने जन्म लिया है ना इसलिए किन्नर आशीर्वाद देने आए हैं,कमला बोली।
अरे,पोती को क्या आशीर्वाद देंगें ? पोता होता तो उनकी झोलियां भर देतीं,पोते से तो वंश बढ़ता है आखिर पोती क्या देगी?वो तो केवल लेकर जाएगी वो भी ढ़ेर सारा दहेज, शकुन्तला देवी बोलीं।।
तभी बंद दरवाजे पर दस्तक हुई....
मां जी! दरवाज़ा खोलिए,हम सब बिटिया को आशीर्वाद देने आए हैं, किन्नर बोले।
शकुन्तला देवी ने बंद दरवाजे को खोलते हुए कहा__
पोती को क्या आशीर्वाद दोगे ? पोता होता तो बात अलग थी और तुम लोगों को देने के लिए मेरे पास कुछ भी नहीं है !
ना मां जी!हम लेने नहीं देने आएं हैं,वो भी आशीर्वाद और ये रहें ग्यारह हजार रूपए इन पैसों से बच्ची का खाता खुलवा दीजिएगा,बच्ची कहां है हम उसका मुंह देखे बिना यहां से नहीं जाएंगे, किन्नर बोले।
शकुन्तला देवी ऊपर गई और पोती को ले आईं__
तभी उनमें से एक किन्नर ने उसकी बलाइयां ली और ग्यारह हजार उसके पास रखते हुए बोली__
ये ले मेरी बच्ची ! सदा खुश रह!
उस दिन बंद दरवाज़ा खुलवाकर किन्नर बच्ची को आखिर आशीर्वाद दे ही गए और शकुन्तला देवी खड़ी देखतीं रहीं।
