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Rajesh Mehra

Inspirational

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Rajesh Mehra

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भूख लगती है

भूख लगती है

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'ऐ माँ कुछ खाने को दे न....ऐ माँ दे न...।' बाहर दरवाजे से आवाज आई।

रजाई में कांपती सुधा ने अपने पति कमल को कहा जो कि आज ठंड की वजह से काम पर जाने पर आना कानी कर रहे थे 'सुनो ना देखो कौन है बाहर ?' 

'सुधा तुम देखो ना मेरी तो रजाई में भी कपकपी छूट रही है।' कमल ने जवाब दिया। 

लेकिन सुधा के कई बार कहने के बाद कमल रजाई से अपना टोपा और गर्म कपड़ों को संभालता हुआ निकला व उसने दरवाजा खोला।

दरवाजा खोलते ही कमल की जैसे झुरझुरी छूट गई हो।

एक गरीब परिवार था जो खाने को कुछ मांग रहा था। एक अपंग व्यक्ति जो बैशाखियों पर खड़ा था और एक औरत जिसकी गोदी में एक छोटी बच्ची थी। लेकिन उनके तन पर इस भरी सर्दी में भी गर्मी के ही कपड़े थे।

कमल तुरन्त किचन में से कुछ खाने को लाया और उनको दिया।

वो दुवाएं देकर आगे बढ़ने वाले थे कि कमल ने पूछा 'तुम लोगों को सर्दी नहीं लगती इतने कम कपड़े पहने हुए है ?' इस पर अपंग व्यक्ति ने जवाब दिया 'नहीं साहब केवल भूख लगती है।' और वो आगे बढ़ गए।

कमल ने दरवाजा बंद किया और सोचने लगा कि ये इस सर्दी को भूलकर अपने लिए खाना लेने निकले हैं जबकि उसके आफिस में तो हीटर लगे हैं और उसके पास तो गर्म कपड़े भी है और वह किसी तरह से अपंग भी नहींं है।

कमल थोड़ा मुस्कुराया और बोला 'सुधा लंच बनाओ में आफिस जा रहा हूँ।'

सुधा भी हैरान थी, अभी तो ठंड लग रही थी और अभी ऑफिस।

उधर कमल को नई ऊर्जा मिली थी।


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