STORYMIRROR

अन्य आय

अन्य आय

2 mins
16.2K


गुप्ता जी उदास चेहरे और थके क़दमों से घर लौटे तो उनकी पत्नी पार्वती पानी का गिलास ले आई। वह उनका चेहरा देखकर ही समझ गई कि जहाँ आज गए थे वहाँ भी उन्हें नौकरी नहीं मिली। बर्खास्त होने के बाद से, इस उम्र में भटक ही रहे थे।

खाना लगाते हुए बोली, "चलिए मुँह- हाथ धोकर खाना खा लीजिए।"

दोनों ही परिस्थितियों से भली- भाँति अवगत थे, इसलिए जैसे- तैसे चुपचाप खाना खत्म किया। थकावट भगाने के लिए गुप्ता जी आराम करने के लिए लेटे तो छत की ओर देखते हुए उन्हें बीते दिन याद आ गए। कैसे बड़े साहब से शिकायत करने पर उन्हीं पर लापरवाही के आरोप लगाए गए। आखिर गुप्ता जी का कुसूर ही क्या था...? बस सबूत और गवाहों का अभाव था।

उन्हें बेकसूर होते हुए भी, झूठे आरोप में फंसाकर नौकरी से बर्खास्त किया गया था। उनकी 20- 25 बरस की ईमानदारी पर किसी ने यकीन ही नहीं किया। करते भी क्यों... सभी तो अंदर से मिले हुए थे।

उसी माह सेवानिवृत्त हुआ चपरासी भी गाँव जाते वक्त बता गया था। किस प्रकार उनके नीचे कार्यरत शर्मा जी, विद्यालय में लगे प्रिंटर, फोटो कापियर इत्यादि पर प्रश्नपत्रों की छपाई के दौरान प्रश्नपत्रों को इधर- उधर करके विद्यार्थियों को बेचते थे।

उस रोज खुद उन्होंने शर्मा जी को एक विद्यार्थी को प्रश्नपत्र के बदले पैसे लेते देखकर कहा था, "शर्मा जी क्या कर रहे हो, कुछ तो शर्म करो...."

"क्या शर्म करूं ?"

"ये गलत है...... 'अन्याय' है...."

"हाँ....मुझे मालूम है, पर अन्याय नहीं 'अन्य आय' है"

फिर 'अन्य आय' की जीत हुई.....

आव़ाज उठाने के जुर्म में, 'अन्य आय' वालों का 'अन्याय' गुप्ता जी पर कहर बनकर टूट पड़ा....।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi story from Drama