अंधेरे में चांदनी की रोशनी
अंधेरे में चांदनी की रोशनी
ये कहानी है एक गाँव की, जहां रहते थे दोस्त आदित्य और संजय। गाँव में एक पुराने हवेली की कहानी बहुत पुरानी थी। लोग कहते थे कि उस हवेली में कोई रात को आत्मा घूमती है। लेकिन आदित्य और संजय इसे विश्वास नहीं करते थे। एक रात, उन्होंने फैसला किया कि वे उस हवेली में जाकर अपने दर्शन करेंगे। चाँदनी की किरनें बिखेर रही थीं जब वे हवेली की ओर बढ़े। दरवाज़ा खुला हुआ था, और अंदर का माहौल अत्यंत चैन और शांत था। धीरे-धीरे, वे आगे बढ़ते गए, पर उनके पास कुछ अजीबोगरीब आवाज़ें सुनाई देने लगीं। एक अजीब सी सरसराहट, जैसे कोई बारिश के बाद के कहीं दूर तरंगें बज रही हों। इन आवाज़ों से डर के कारण उनका दिल तेजी से धड़कने लगा। हवेली के एक कोने में वे एक पुराना खोल देखते हैं। खोल से बाहर आ रही एक आधी-तोड़ी मुर्दा रात के अंधेरे में उन्हें देखता है। वे उसकी ओर बढ़ते हैं, और फिर से खोल खींच लेते हैं। पर वहाँ कुछ नहीं होता है। सब कुछ शांत है, जैसे कुछ भी नहीं हुआ। थोड़ी देर बाद, जब वे लौटने के लिए मुड़ते हैं, तो वे समझते हैं कि हवेली में कुछ बदल चुका है। दरवाज़ा, जो पहले खुला था, अब बंद है। वे यह सोचते हैं कि शायद वे गलत समय पर हैं, या फिर कोई अनजान विलेन उनके साथ खिलवाड़ कर रहा हो। धीरे-धीरे वे लौटते हैं, पर जब वे हवेली से बाहर निकलते हैं, तो उन्हें वहीं मुर्दा पुनः मिलता है, पर इस बार उसकी आँखों में दर्द और डर की झलक है। अगले दिन, संजय गाँव के बड़े पुराने स्थानीय के पास जाता है और उससे पूछता है कि क्या उस हवेली के बारे में कोई कहानी है। वह बुजुर्ग उसे बताता है कि वह हवेली किसी पुराने महाराजा की थी, जो एक बार अपनी बेटी के विवाह के लिए एक युवक को चुन रहे थे। पर उस युवक की मौत हो गई थी।

