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raju pokharnikar

Abstract

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raju pokharnikar

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अभिभावक एवं शिक्षक

अभिभावक एवं शिक्षक

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आजकल के अभिभावक अपने बच्चों के प्रति बहुत ही जागरूक है खासतौर पे शहरी भागों के मध्यमवर्गी अभिभावक। अभिभावक अपने बच्चों की हर ख्वाइशों को पूरा करने के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार है।हर अभिभावक चाहता है की उनका बच्चा एक अच्छे से स्कूल में दाखिला मिले और इसलिए वे एक अच्छे स्कूल की तलाश में रहते है। जिस स्कूल में सारी सुविधायें मौजूद हो, भले ही उस स्कूल की फीज़ भले ही उन्हे भारी क्यों न पड़े, ऐसे ही स्कूलों में बच्चे को दाखिल करने की होड़ लगी है।

खासतौर में अँग्रेजी माध्यम के प्राइवेट स्कूलों में अपने बच्चों को दाखिल करते है। वैसे देखा गया है कि जिस स्कूल में डोनेशन और फीस की प्रथा हो ऐसे स्कूल की तरफ आकर्षित होकर अभिभावक ऐसे ही स्कूलों में अपने बच्चों को दाखिल करते है।बाहरी और अंदरूनी आकर्षित रखरखाव के कारण और सारे सुख सुविधा होने के कारण अभिभावक ऐसे सुंदर स्कूल में अभिभावक अपने बच्चें को डाल देते है। कुछ अभिभावक हिन्दी मीडियम में तो कुछ कोनवेंट शिक्षा पसंद करते है। जो स्कूल अपने बच्चों की प्रतिभाशक्ति को बढ़ावा देती है ऐसी ही स्कूलों की तरफ अभिभावकों का ज्यादा ही झुकाव होता है। जिस स्कूलों में शिक्षक कर्मचारी अध्यापन की गुणवत्ता अव्वल हो और वर्तमान समय में समाज में अत्यंत लोकप्रिय है कुछ ऐसे ही स्कूलों की तरफ अभिभावकों की अधिक पसंद होती है।

हर अभिभावक को लगता है कि मेरे बच्चें ने पढ़ लिखकर कुछ तो करेंगे किन्तु कभी कभी उचित मार्गदर्शन की कमी की वजह से वह बच्चा, उसका ध्येय या उसके सपनों की ऊँचाई छु ही नहीं सकता। किन्तु अगर उस बच्चे को अगर सही रास्ता दिखानेवाला गुरु या शिक्षक मिले तो वही बच्चा अपने जीवन में सफलता की उच्चतम सीढ़ी चढ़के यशस्वी बन जाता है। इसी कारण जिस स्कूल की शिक्षक, शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावशाली हो और हर बच्चे को आदर्श नागरिक बनाने में सफल हो कुछ ऐसी ही स्कूलों तलाश में हर पल कोशिश में रहते है।

आज का जमाना केवल एक या दो बच्चों का ही है। बच्चा एक हो या दो आजकल के अभिभावक अपने बच्चों से ज्यादा प्यार करते है। बच्चे उनके लिए आंखो के तारे होते है, उनके अरमान, उनके सपने, उनका भविष्य, उनके बुढ़ापे की लाटी या यूँ कहिए उनका सहारा सब कुछ उन्हीं में ही होता है।उनकी हर चाहत को पूरा करने में वे किसी भी हद तक जाते है।बच्चों की हर इच्छा चाहे चोटी हो या बड़ी उन्हे पूरा करने के लिए कोई भी कसर बाकी नहीं रखते।हर अभिभावक की उनके बच्चों पर उम्मीदें टिकी हुई है। उनका बच्चा पढ़ लिखकर उनका और उनके परिवार का नाम रोशन करेगा। इसी कारण उन्हे लगता है की उनका बच्चा हर क्षेत्र में अव्वल करें। वे सदा ही सचेत और जागरूक रहते है।घर में छोटी उम्र में बच्चों के हाथ में मोबाइल, गाड़ी और टीवी पर के कार्टून। महंगे से महंगे कपड़े, खिलौने मॉल से खरीदकर देना वे अपनी शान समझते है।उनकी हर ख्वाइशों को पूरा करते है। वे उनके बच्चों की हर सही गलत हरकतों पर प्यार आता है। बच्चों का दिल न दुखे या उन्हे बुरा न लगे इस लिए गलतियाँ होने पर उन्हे अभिभावक कभी बच्चों को डाँटते नहीं। नतीजा बच्चों को केवल अपनी ही बात सही लगती है। बच्चों का ज्यादा से ज्यादा समय स्कूल ट्यूशन ग्रहपाठ , मोबाइल, वीडियो गेम्स कार्टून आदि बातों पर व्यतीत होता है। अभिभावक दोनों ही काम पर जाने के कारण उन्हे केवल पैसे कमाने की होड़ लगी है। यही कारण है कि आजकल के माता-पिता के पास अपने बच्चों के लिए वक़्त नहीं।

एक तो अभिभावक अच्छे से अच्छे स्कूल में अपने बच्चों को दाखिल करने की उम्मीद रखते है और उन्हे लगता है कि एक बार बच्चे को दाखिल करने के बाद उनके बच्चों का भविष्य बनाने कि तमाम जिम्मेदारियाँ केवल स्कूल कि है, शिक्षकों की ही है। वैसे तो सभी स्कूलों में शिक्षक बच्चों को अच्छी से अच्छी तालिम देकर उन्हे एक अच्छा और सफल नागरिक बनाने के लिए कमर- तोड़ मेहनत करते है। शिक्षक अपने घरेलू कामकाज़, जिम्मेदारियाँ, परेशानियाँ भूलाकर विद्यार्थियों का भविष्य सुधारने में दिन रात एक करते है। वे अपनी शैक्षणिक जिम्मेदारियों से मुख नहीं मुड़ते। वे अपना सब कुछ दाँव पर लगा देते है। जब भी किसी बच्चे को किसी क्षेत्र में अव्वल आता है तो सबसे ज़्यादा खुशी शिक्षक के चेहरे पर, दिल में और रोम-रोम में दिखाई देती है। उसके दिल में किसी भी बच्चे के लिए जलन, तिरस्कार एवं नफरत नहीं होती। वह बच्चों को एक माँ से भी बढ़कर परवरिश करती है। इतिहास गवाह है की जो आदर्श शिक्षक होते है उनके हाथों से हमेशा बच्चों का जीवन फला फूला हुआ है। वे बच्चें जो शिक्षकों को छात्र छाया में होते है, वे सफलता को उच्चतम चोटी पेन पहुंचे हुए है। दुनिया में केवल शिक्षक ही ऐसा प्राणी है जो की संसार में अपने बच्चों की सफलता पर गर्व महसूस करता है। वह हमेशा चाहता है की उसका विद्यार्थी हमेशा सुखी रहे, सफलता की हर सीढ़ी पार करें। यही उसका सबसे बड़ा सपना होता है, सबसे बड़ा सम्मान होता है और यही उसका दुनिया का सर्वोच्च नोबल पारितोषिक होता है। किन्तु बच्चों का भविष्य सँवारने में थोड़ा माता-पिता का भी योगदान होना ज़रूरी है। उनसे ज़्यादा उम्मीद न करते हुए शिक्षक केवल अभिभावक से यही चाहते है कि थोड़ा सा अपना कीमती वक़्त दे दे।

थोड़ा खाली समय निकालकर बच्चों के साथ बैठे, खूब बातें करें, नैतिकता भरें कहानियाँ सुनाएँ, रिश्तों की अहमतों को समझाएँ। अच्छे-बुरे में फ़र्क समझाएँ। समय के साथ होने वाले परिवर्तनों से वाकिफ़ करें। बच्चों के अच्छा काम करने पर उसकी तारीफ करें। पढ़ाई की तरफ उसका रुझान बढ़ाएँ। उसकी रुचि किस बात में है, और वह आगे क्या बनना चाहता है वही उसे करें दे। उसके दिल में किसी भी बात का डर न डाले या उसका मनोबल दुर्बल न करें। भले ही दिखने में ठीक ठाक न हो, उसके दिल में आशादायक भावनाएँ डाल दो कि वह दुनिया का सबसे सुंदर और खुबसूरत बच्चा है। उसे यह एहसास दिला दो कि वह भी उसमें में भी वह प्रतिभा है जो कि सचिन तेंदुलकर में है, लता मंगेशकर में है, अमिताभ बच्चन में है, बिल गेट्स में है ए पी जे अबुल कलम आज़ाद में या फ़िर मदर तेरेसा में है। उसे हर धर्म का ज्ञान दो ताकि वह हर धर्म का सम्मान करें और सबके साथ प्यार से रहे। उसे वह अपनापन दीजिये ताकि वह कभी भी अपने आप को तन्हा या अकेला असुरक्षित न समझे। उसकी तुलना अन्य बच्चों से या फ़िर अपनों से न करें, और नाही उसे बार-बार न कोसे। उसकी असफलता पर न डांटे, न ग़ुस्सा करें, बल्कि उसका मनोबल बढ़ाएँ। घर का वातावरण प्रसन्न रखें। बच्चों के सामने किसी भी तरह का व्यसन न करें। बच्चों को झूठी आशा न दे। धर्म के नाम पर मजहब के नाम पर उसे ना डराएँ, ना ही अंधविश्वासों पर विश्वास रखने को सिखाएँ।

उसे मोबाइल और कार्टून से थोड़ा दूर ही रखें औरे ज्यादा से ज्यादा किताबें, अखबार पढ़ने की आदत डालें। उसे नाज़ुक और कमज़ोर न बनाएँ बल्कि शारीरिक और मानसिक तौर पर मजबूत और शक्तिशाली बनाएँ।

दुनिया में किसी भी बच्चे के लक्ष्य की ओर अगर कोई ले जाता है वह है केवल अभिभावक और शिक्षक। दोनों में से अगर कोई कड़ी कमजोर होती है तो बच्चे अपनी मकसदों से, अपने इरादों से भटकेगा। वह जीवन भर कभी भी तय नहीं करेगा कि उसे भविष्य में क्या बनना हैं। तो आज कल के दौर में ज़रूरी है की अभिभावक जागरूक रहें और शिक्षकों की सहायता से अपने बच्चे का भविष्य उज्ज्वल, सफल और समृद्ध बनाएँ। बस अभिभावक अपने बच्चों के शिक्षकों पर विश्वास और श्रद्धा रखें और बदले में अपने बच्चे को एक कामयाब, होनहार और प्रतिभाशाली पाएँ।


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