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ashok kumar bhatnagar

Inspirational

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ashok kumar bhatnagar

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आपके कल के लिए हमने अपना आज कुर्बान किया है'।

आपके कल के लिए हमने अपना आज कुर्बान किया है'।

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जब मैंने जवानी की दहलीज पर कदम रखा था, प्रेम के बीज मेरे जीवन में भी अंकुरित हुए थे। उस समय मेरी उम्र लगभग चौबीस साल की थी और मैं देहरादून के एक प्रतिष्ठित कॉलेज में मैथमैटिक्स की प्रोफेसर थी। 

      एक दिन मैं अपनी सहेलियों के साथ ऋषिकेश घूमने गयी। अचानक वहां बहुत तेज बारिश होने लगी। मैं भीग गयी थी। मैं तेजी से गंगा नदी के किनारे चल रही थी। शाम हो चुकी थी और मुझे देहरादून के लिए बस पकड़ना था। इसी आपा धापी में मेरा पैर फिसल गया और मैं सीधे गंगा में गिर गयी। मुझे लगा कि अब वो जीवित नहीं बचेगी और मर जायेगी। 

      तभी झड़प की आवाज आयी और मैं किसी जबान लड़के की बाँह में थी और उसके सीने से बुरी तरह से चिप की हुई थी। बह उसे किनारे लेकर आया और बहुत देर तक उसकी कमर सहलाता रहा। मैं भी कोई एतराज ना कर सकी। अचानक कई आवाजें एक साथ आयी ,"भाई, बहिन जी ठीक हैं। आप छोड़ दे। काश हमारी किस्मत भी ऐसी होती। हम भी किसी सुंदरी को नदी से निकालते। उसकी कमर सहलाते।"  मैं शर्मा गयी और तेजी से उठ कर खड़ी हो गयी। पता चला की बह आई एम ए के आर्मी ऑफिसर थे और स्विमिंग के लिए गंगा नदी आये थे और जिसने मुझे डूबने से बचाया था, उसका नाम विशाल था।

          जब भी विशाल खाली होता, वो मेरे होस्टल आ जाता। हम दोनों स्विमिंग करते। उसने मुझे स्विमिंग करना सिखा दिया था। मैं जान बूझ कर उससे स्विमिंग करते हुए चिपट जाती थी। साथ साथ मार्केट में घूमते। पिक्चर देखते और खाना खाते। और इस तरह हम दोनों की जिंदगी मजे में कट रही थी। मैं और विशाल मिलते रहे और हमने शादी करने का फैसला कर लिया। तभी कारगिल युद्ध शुरू हो गया और उसकी पोस्टिंग कारगिल हो गयी। विशाल मुझसे यह कह कर गया था की बह कारगिल युद्ध के बाद शादी कर लेगा। किन्तु बह आ ना सका।

        मई १९९९ से शुरू हुआ कारगिल युद्ध मेरे लिए  लिए बहुत ही बेचैनी बाला और तकलीफ बाला था। मैं सारे दिन रेडियो , टी वी और अखबारों में कारगिल युद्ध की खबरें खोजती रहती थी।।

        आज मुझे समाचार से पता चला की कर्नल रण जीत सिंह के पुत्र मेजर विशाल सिंह १४ जाट के कंपनी कमांडर दुश्मनों का मुकाबला करते हुए शहीद हो गए। उनका सैनिक सम्मान के साथ दाह संस्कार कल बरेली में होगा। यह मेरे लिए बहुत ही दुखद सूचना थी। मैंने कार द्वारा बरेली जाने का फैसला किया। 

     ला खो की भीड़ थी। लोग रो रहे थे और चीख चीख कर कह रहे थे ," भारत माता की जय हो। विशाल अमर रहे। विशाल अमर रहे। " विशाल के फ्रैंड के बैठने के लिए अलग व्यवस्था थी। मैं गम सुम सी एक कोने में बैठ गयी। मैं तो यह भी समझ नहीं पा रही थी कि यदि किसी ने पूछ लिया कि तुम विशाल की कैसी फ्रैंड हो तो वो कैसे सामना करेगी। 

         लाखों की भीड़ में मैंने देखा कि एक आर्मी अफसर मुझे लगातार देख रहा हैं और मेरी तरफ बढ़ रहा हे। मैं थोड़ा घबरा गयी। 

         पास आने पर में उस को पहचान गयी। वो विशाल का दोस्त था और जिन अफसरों ने उसे गंगा में डूबने से बचाया था। उनमें से एक वो था ।वो मुझसे बोल रहा था ,”जब त्याग और बलिदान का जिक्र होगा तब भारत की सेना का जांबाज सैनिक विशाल को जरूर याद किया जाएगा। वतन की रक्षा और तिरंगे की शान में अपना जीवन क़ुरबान करने वाले माँ भारती के वीर सपूत शहीद होकर अपना सर्वस्व बलिदान दे देते हैं। 

     वो मेरे पास आते ही बोला ,"विशाल तुमसे बहुत प्यार करता था। अक्सर तुम्हारे बारे में बातें करता रहता था। विशाल कहता था की वो कारगिल पोस्टिंग के बाद शादी कर लेगा। किन्तु ईश्वर को कुछ और मंजूर था। आखरी बार विशाल से रात को मेस में मुलाकात हुई थी वो कह रहा था ," कल मुझे युद्ध में जाना हे। अगर मैं कल बच गया तो छुट्टी लेकर घर जाऊंगा और उससे शादी कर लूंगा। यदि मैं कल शहीद हो जाऊं। तो तुम यह चिट्ठी उस को दे देना, मैं जानता हूँ कि वो मेरे अंतिम दर्शन करने और मेरे शव पर फूल चढ़ाने जरूर आएगी। "

       मैंने घबराते हुए उस चिट्ठी को खोला। उसमें लिखा था ," मुझे माफ़ करना मेरी जान। तुम किसी और से शादी कर लेना। जब तुम लोगों से मिलो तो उनको जरूर बताना कि उनके कल के लिए हमने अपना आज क़ुरबान किया हैं'। अब मैं बरेली से वापस देहरादून जा रही हूँ। मेरा सब कुछ ख़त्म हो गया हैं। फिर भी मैं विशाल पर बहुत फ़ख्र महसूस कर रही हूँ। मुझे किसी के द्वारा लिखी यह कविता याद आ रही हैं। 

          युद्ध में ज़ख्मी सैनिक साथी से कहता है

‘साथी घर जाकर मत कहना, सके तो में बतला देना 

यदि हाल मेरी माता पूछें तो, जलता दीप बुझा देना! 

इतने पर भी न समझे तो दो आँसू तुम छलका देना!! 

यदि हाल मेरी बहना पूछे तो, सूनी कलाई दिखला देना! 

इतने पर भी न समझे तो, राखी तोड़ दिखा देना !! 

यदि हाल मेरी पत्नी पूछे तो, मस्तक तुम झुका लेना! 

इतने पर भी न समझें तो, मांग का सिंदूर मिटा देना!! 

यदि हाल मेरे पापा पूछें तो, हाथों को सह ला देना! 

इतने पर भी न समझे तो, लाठी तोड़ दिखा देना!! 

यदि हाल मेरा बेटा पूछे तो, सर उसका सह ला देना! 

इतने पर भी न समझे तो, सीने से उस को लगा लेना!! 

यदि हाल मेरा भाई पूछे तो, ख़ाली राह दिखा देना! 

इतने पर भी न समझे तो, सैनिक धर्म बता देना!!



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