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Vimla Jain

Inspirational

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Vimla Jain

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आफिसरी का भूत

आफिसरी का भूत

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सुरेंद्र इंजीनियरिंग फाइनल ईयर में पढ़ रहा था ।उसकी केंपस इंटरव्यू में कोई कंपनी में बेंगलुरु में नौकरी पक्की हो गई थी, और फाइनल ईयर की परीक्षा के बाद के बाद उसको नौकरी ज्वाइन करनी थी ।उसकी परीक्षा के थोड़े दिन बाद ही उसके पिताजी जो कि बहुत ही अच्छे ओहदे पर थे ऑफिसर थे रिटायर हुए।उन लोगों को सरकारी बंगला छोड़ना पड़ा। उन लोगों ने पहले से ही बंगला छोड़ने के बाद में रहने के लिए सोसाइटी में फ्लैट ले रखा था।वे लोग रिटायरमेंट के बाद में वहां रहने चले गए ।

पहले ही दिन सुरेंद्र के पिता मिस्टर शर्मा और उनकी धर्मपत्नी मिसेज शर्मा नीचे सोसायटी के गार्डन में घूमने गए तो उनके पीछे से किसी ने आवाज लगाई ,और उन को नमस्कार करा। जिस ने आवाज लगाई थी वह उनका कंपनी का हेड क्लार्क था।और उसने हाथ जोड़े और खुश होते हुए बोला " सर आप यहां,आप इस सोसायटी में रहने आ गए बहुत अच्छी बात है ।"

तो मिस्टर शर्मा अपने गुरुर में खाली "हां रहने आ गया" और बिना बात किए एकदम रुखा व्यवहार करते हुए वहां से निकल गए ।उनकी मिसेज पीछे रह गई ।उन्होंने उनसे बात करी और काफी खुश थी। वहां से घर आकर मिस्टर शर्मा अपनी पत्नी को धमकाने लगे ,और गुस्सा करने लगे कि तुमने मेरे  मातहत कर्मचारी के साथ क्यों इतनी देर बात करी और क्यों इतनी खुश हो कर के बात कर रही थी।

मिसेज शर्मा ने जवाब दिया वह बात अलग थी जब आप ऑफिस में काम करते थे, ऑफिसर थे रौब रखते थे लोगों से एक दूरी बनाकर रखते थे।मगर आज आप भी रिटायर हो गए हैं वह भी रिटायर हो गए हैं तब दोनों एक ही जगह एक ही स्थिति में आ गए हैं तो इसमें छोटा बड़ा क्या।अब आपकी ऑफिसरी छोड़ कर के लोगों के साथ में रिश्ते रखना सीखिए।इतनी देर में उनका बेटा भी आ जाता है वह बोलता है "हां पापा मां सही कह रही हैं ।

आप ऑफिसर अपने ऑफिस में थे ।मगर यहां फ्लैट्स में सब अपन एक दूसरे के पड़ोसी हैं।जब तक एक दूसरे से मिलेंगे नहीं अच्छी तरह नहीं रहेंगे, तब तक आप यहां खुश नहीं रह सकेंगे।

यह सरकारी कॉलोनी नहीं है जहां एक बॉस का घर था, इसलिए सब आपको आते जाते सलाम करते थे यहां सब एक बराबर है। इसीलिए आप अपना यह गुरुर छोड़ दीजिए। और सबको बराबर मानिए तभी हम यहां पर सारी कॉलोनी में सबके साथ में दोस्ती और भाईचारे से शांति से रह सकेंगे।मेरा तो क्या है मैं तो शुरू में तो अकेला ही नौकरी करने जाऊंगा ना उसके बाद ही आप लोगों को बुला सकूंगा ।तब तक आपको अपना सर्किल खुद ही बनाना पड़ेगा ।

इसलिए पापा आपको यह गुरुर को छोड़ना ही पड़ेगा कि मैं ऑफिसर हूं मैं बॉस हूं घर में भी आप मां के ऊपर ऐसे ही हुक्म चलाते हैं। अब आप घर में रहते हैं मां के साथ में थोड़ा अच्छे से रहिए ।आपको जिंदगी इनके साथ ही काटनी है ।एक दूसरे से मिलजुल कर रहिये और कॉलोनी में भी सबसे मिल जुल कर रहिये तो ही अच्छा रहेगा ,नहीं तो आप अकेले पड़ जाएंगे। "

मिस्टर शर्मा पर बेटे की बात का कोई असर नहीं होता ।इसी तरह से अकेले-अकेले घूमते रहते दिमाग में हमेशा एक ही बात चलती रहती ,यह मेरा मातहत कर्मचारी उसकी हिम्मत कैसे हुई मेरे को पीछे से आवाज लगाकर बोलने की ।एक दिन वे अकेले घूमने निकल गए ।क्योंकि मिसेज शर्मा सब से बात करती थी जो उनको अच्छा नहीं लगता था उनको वहां पर भी सब का बॉस बनकर ही रहना था ।रस्ते में वे थक गए और पता नहीं क्या हुआ जो चक्कर आने लगे उनको और एक बेंच पर बैठगए पास वाली बेंच पर उनके साथ वाले कर्मचारी बैठे थे ।उन सज्जन ने कहा "सर आपको क्या हो रहा है । फिर उन्होंने देखा इनकी तबीयत ज्यादा खराब हो रही है ।"

तो वह किसी तरह से उनका घर पास ही था तो आवाज लगाकर घर से एक दो जनों को बुलाते हैं।और उनको उठाकर अपने घर ले जाते हैं। और वहां उनकी देखभाल करते हैं जब तक वह ठीक नहीं होते।और उनके घर के फोन नंबर के बारे में पता करके फोन करके उनके बेटे और पत्नी को बुला लेते हैं ।

उनके घर का वातावरण और सुंदर सा घर देखकर और मिस्टर शर्मा की तबीयत के समय जिस तरह उन्होंने मदद करी होती हैवह सब देख कर के उनके मन में थोड़ा बदलाव होने लगा।वह बोलते हैं आपका बहुत-बहुत धन्यवाद कभी हमारे घर आइए।और वे घर चले जाते हैं।घर चले जाने के बाद वे अपने पुत्र काधन्यवाद करते हैं कि तुमने मेरा नजरिया बदल दिया।

और आज तुम्हारे उन अंकल ने मेरी मदद करके मेरा नजरिया एकदम सही कर दिया है, कि यह सही है कि रिटायरमेंट के बाद में सब एक जैसे ही होते हैं।

कोई बॉस और कोई कर्मचारी नहीं होता ।और हमको यहां रहना है तो सबके साथ में अच्छी तरह ही रहना होगा।मुझे आज तुम्हारी यह बात समझ में आई है। धन्यवाद बेटा ।और उनका व्यवहार उनके पड़ोसी और बिल्डिंग में लोगों के साथ और अपनी पत्नी के साथ बच्चे के साथ काफी सौम्य हो जाता है।

यह ऑफिसरी का भूत रिटायरमेंट के बाद में बहुत लोगों के सिर चढ़कर बोलता है वह तकलीफ करता है ।वे यह नहीं सोचते कि कल तक हम बॉस थे मगर आज हम रिटायर हो गए हैं ।इज्जत कुर्सी की होती है।ओहदा कुर्सी का होता है।जिस तरह से जिस की कुर्सी उसकी सत्ता। और कुर्सी गई और सत्ता गई ।

उसी तरह रिटायर्ड इंसान का होता है।जब तक कुर्सी पर है तब तक पूछ है एक बार कुर्सी से उतरे सब एक बराबर।


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