आईने का रहस्य भाग 5
आईने का रहस्य भाग 5
भाग 5
भीमा को आईने में गायब होते ही आईना के पास की रोशनी भी गायब हो जाती है, आईना एकदम शांत हो जाता है, तीनों की हालत खराब होती है, उन्होंने अपनी आंखों के सामने ही सब कुछ देखा पर वह किस से कहें तभी आईने में फिर से आवाज़ आनी शुरू होती है तो रमेश तुरंत उस पर पर्दा लगा देता है।
मोहन प्रसाद तो अभी तक हतप्रभ खड़े आईने की तरफ देख रहे हैं, उन्हें अब भी भरोसा नहीं हो रहा है कि ये सब आईने में झांकने से हुआ है, प्रोफेसर अभी भी आईने को ही देख रहे हैं।
रमेश कहता है "साहब जल्दी से बाहर चलो।"
दोनो को जैसे होश आता है और वह हड़बड़ा कर गिरते गिरते बचते हैं , रमेश दोनो को सहारा देकर बाहर लाता है और , दरवाजा बाहर से बंद करता है, वह गरम कॉफी का ऑर्डर देता है।
प्रोफेसर मोहन से कहता है, " भाई साहब आप ठीक तो हैं ना , ये सब क्या है , ये दुर्गा बेटी को भी ये सब मुसीबत लाने की क्या जरूरत थी।"
मोहन कहता है , " उसको भी तो लील गया है वो आइना , अब हम क्या करे, कौन मानेगा हमारी बात।"
प्रोफेसर कहता है " मैं एक व्यक्ति को जनता हूं जो रूहानी शक्तियों का बादशाह कहलाता है , वह भी पहले हमारे ही कॉलेज में प्रोफेसर था , पर कई सालो से सुपर नेचुरल पावर पर काम कर रहा है , शायद उसके पास कोई इलाज़ हो।"
मोहन कहते हैं " अभी कॉल कर के बुलाओ उनको पता नहीं मेरी बच्ची के साथ क्या बीत रही होगी , देखा तो था उसका चेहरा कितना दुखी लग रही थीं दोनों मां बेटी, पता नहीं और भी कितने लोग उसमें फंसे हैं।"
प्रोफेसर तुरंत फोन लगाता है , सामने से जय ने फोन उठाया और पूछा " येस कौन बोल रहे हैं , "??
प्रोफेसर साहब बोलते हैं , " नमस्कार जय करण जी मैं डॉक्टर योगेश बोल रहा हूं , अपने पहचाना "!?
वह कहता है , " हां हां , अच्छी तरह से पहचानता हुं , डॉक्टर योगेश जी कॉलेज की शान थे हैं और रहेंगे , भला आप जैसी शख्सियत को भला कौन भूल सकता है , ये तो हमारी खुश नसीबी है जो अपने कॉल किया, आदेश करे कैसे याद किया, "!
प्रोफेसर उन्हे सब कुछ बताते हैं तो वह चौक उठते है और कहते हैं " ऐसे
आईने के बारे में अभी कुछ दिन पहले ही हम सब डिस्कस कर रहे थे , आप कहां हैं मैं तुरंत अपने साथी के साथ पहुंच जाऊंगा।"
तो प्रोफेसर उन्हे पता बताते हैं तो वह कहते हैं कल सुबह तक हम आपके पास होंगे , !"
प्रोफेसर उस से कहते हैं " आपका स्वागत है , और धन्यवाद भी।"
प्रोफेसर मोहन से कहते हैं , " वह सुबह तक पहुंच जायेंगे, उनके लिए एक कमरा साफ़ करवाना होगा।"
रमेश सब समझ जाता है और कहता है , "आपके कमरे के बाजू वाला कमरा उनको दे देते हैं।"
मोहन कहता है " यह ठीक रहेगा दोनो साथ ही रहेंगे , एकाध नौकर बढ़ाना है तो बढ़ा लीजिए किसी को तकलीफ नहीं होनी चाहिए ।"
रमेश कहता है " आप बेफिक्र रहे सब व्यवस्था हो जाएगी।"
मोहन रात में खाना खाने के बाद अपनी बेटी और पत्नी को याद कर रोने लगता है , प्रोफेसर उसे समझाता है कि" सब ठीक हो जाएगा , कल सुबह जय आजाएंगे तो वह सब सम्हाल लेंगे।"
मोहन कहता है "चार लोग इस आईने ने निगल लिया है पता नहीं और कितने निगलेगा , मुझे लगता है कि मैं भी आईने में चला जाऊं कम से कम अपने परिवार के साथ तो रहूंगा अगर वह सही सलामत हो और नहीं भी होंगे तो भी मैं अकेला जी कर क्या करूंगा।"
प्रोफेसर किसी तरह उनको शांत कराते हैं , मोहन के सोने के बाद प्रोफेसर अपने कमरे में जाकर किताबों में आईने के बारे में खोज करना शुरू करते हैं , उन्हें दुर्गा की एक डायरी उन्हें दिखाई देती हैं वह उसको उठाकर पढ़ते हैं तो उन्हें पता चलता है , कि दुर्गा भी रूहानी दुनिया की काफी जानकारी रखती थी और वह इसके काफी तह तक पहुंच गई थी, वह सोचते हैं "आखिर उसके साथ क्या हो रहा होगा , आईने के अंदर की दुनिया कैसी होगी , साधारण तो नही होगी , हो सकता है बहुत ही भयानक हो, और अंदर सब बहुत तकलीफ में हो।"
यह सब सोचते सोचते वह चेयर पर बैठे हुए सो गए।"
सुबह सुबह भीमा की पत्नी और बच्चे बाहर आकर वॉच मैन से भीमा के बारे में पूछती हैं तो वॉच मैन कहता है वह उसके सामने नहीं आया था, तभी रमेश आकर उनसे कहता है " भीमा तो यहां आया था , पर चला गया था, "!
वह कहती है कि" वह घर तो आया नही घर में पैसे भी नहीं है।"
रमेश उसे कुछ पैसे देता है और कहता है , "कहीं पूजा पाठ करवा रहा होगा , आजाएगा जाओ अभी साहब लोग देखेंगे तो नाराज़ हो जाएंगे।"
वह अभी उन्हे टालना चाह रहा था, !
आगे की कहानी अगले भाग में पढ़िए , , , !

