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Rekha Rana

Drama

3  

Rekha Rana

Drama

आदर्श सन्यासी

आदर्श सन्यासी

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"और कहिए शगुन जी कैसी है आपकी नयी बहू ?" व्यंग्यात्मक लहजे में विनीता ने पूछा।

"अच्छी है।" शगुन ने संक्षिप्त सा जवाब दिया।

"कश्मीरन है ना।" विनीता ने दूसरा प्रश्न उछाल दिया।

" हाँ ,ये तो सबको पता है, रिसैप्शन में तो आप भी गई थी ना।"जवाब सरला ने दिया था।

"अब छोडो भी, कोई और बात करते हैं।" सरला ने बात बदलते हुए कहा।

"नहीं कोई बात नहीं जरा सुने तो सही विनीता जी आखिर हमसे कहलवाना क्या चाहती हैं ?" शगुन ने मुस्काते हुए कहा।

सकपका सी गई विनीता।

"अरे पडौसी हैं, इतने सालों का साथ है अपना ,अच्छे से जानते हैं एक दूसरे को, अब अगर इनकी जिज्ञासा शांत नहीं हुई तो पेट गुडगुड करेगा इनका।" माहौल को हल्का करने की गरज से शगुन बोली।

"हाँ मैं वो..।" विनीता ने शर्मिंदा सी होते हुए बोली।

"पूछिये।"

 "आप.. आपकी रसोई में प्याज भी नहीं आता, और आपकी बहू वो तो........।"

 "अच्छाss तो इस बात ने आपको परेशान कर रखा है।" शगुन के मुँह से निकला।

" हाँ खाती है ये सच है, जिस माहौल से प्रीति आई है, वहां मांस खाना बुरा नहीं माना जाता,और दूसरा सच ये भी है कि वो कभी घर पर ऐसा खाना नहीं बनाती। जिस दिन उसे खाना होता है मुझ से पूछकर बेटे के साथ चली जाती है। इसमें कोई बहुत बड़ी बात भी नहीं, मेरा जैसा मन करता है मैं खाती हूँ, और बच्चों को जो अच्छा लगता है वो खा लेते हैं, बस एक दूसरे की भावनाओं का सम्मान करो, भई घर में शान्ति रखने का अपना तो यही मंत्र है।" शगुन ने सधे शब्दोंमें जवाब दे दिया।

"बढ़िया है आपका मंत्र,और हर समस्या का हल होता है आप के पास एक पहुँचे हुए संन्यासी के जैसे ।"विनीता ने हँसते हुए कहा।

"अरे घर से फोन आ रहा है चलती हूँ।"कह कर शगुन उठ खडी हुई।

"कई बार मैं भी शगुन जी से यही कहती हूँ "। सरला ने कहा।

"क्याss ?"

"के उनको तो संन्यासी होना चाहिए था कहाँ गृहस्थी के जंजाल में फँस गयी।"

"सरला जी वो आज भी संन्यासी ही है।" शगुन के घर की ओर देखते हुए विनीता ने कहा।


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