ज़िन्दगी की रफ्तार
ज़िन्दगी की रफ्तार
जिन्दगी की रफ्तार जो थम जायें।
समझ लो आदमी का दम निकल जाये।।
उम्र रहते कर लो अपने सारे काम।
ज़िन्दगी कहीं बर्फ जैसी न जम जायें।।
गलत राहों से अगर गुजर रहे हो तो।
देखो राह में कहीं कांटे ना चुभ जायें।
शराबी बन जाता है दुखी हुआ आदमी ।
समझता था हयात से गम बढ़ जायें।।
कभी नहीं बिगड़ता कोई आदमी।
अगर कोई उसे संवारने में रम जायें।।
अनपढ़ हुआ तो क्या वो है आदमी।
कोरे स्टॅम्प पर न कभी थम जायें।।
अगर आप जिन्दगी को समझ लो।
तो समझते ही दुनिया से गम जाये।।
