STORYMIRROR

सतीश मापतपुरी

Inspirational

4  

सतीश मापतपुरी

Inspirational

योग-दोहावली

योग-दोहावली

1 min
245

योग पुराना है बहुत, नहीं आज की बात।

कर्म - कुशलता योग है, गीता की सौगात।


बिखरा था जो वेद में, योग - ज्ञान भंडार।

पातंजलि समेट उसे, दिया हमें उपहार।


योग महज कसरत नहीं,यह इक साँस विधान।

ज्ञान,भक्ति औ कर्म ही, इसके हैं सोपान।


सुबह उठें योगा करें, बिल्कुल खाली पेट।

नित्य इसे करते रहें, सेहत रखें समेट।


सेहत जैसा धन नहीं, तन सा ना जागीर।

कुदरत ने सबको दिया, इक अनमोल शरीर। 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational