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Sudhir Srivastava

Abstract

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Sudhir Srivastava

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यमराज का इंतजार

यमराज का इंतजार

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लघु कथा यमराज का इंतजार आज सुबह-सुबह मित्र यमराज ने फोन करके बताया कि वह आ रहा है और नाश्ता हमारे साथ ही करेगा। मैंने कहा - स्वागत है तेरा।मगर जल्दी आना .....और उसके बाद मैं दैनिक क्रिया से निवृत्त होकर उसका इंतजार करने लगा। इंतजार करते-करते दोपहर हो गई मगर तब भी जब वह नहीं आया, तो मैंने उसको फोन लगाया, तो उसका फोन बंद आया। अब मुझे गुस्सा भी आने लगा। फिर भी उसका इंतजार करने के अलावा और मेरे पास कोई विकल्प भी नहीं था। क्योंकि ऐसा वह कभी-कभी ही करता है और जब कहता है, तो समय पर आता की इसलिए मुझे थोड़ी चिंता भी होने लगी और जिसके कारण मेरा बीपी और शुगर दोनों अपना रंग दिखाने लगे । यह देखकर श्रीमती जी ने पहले तो मन की भड़ास निकाली और फिर यमराज को कोसते हुए मेरे मित्र डॉक्टर के पास ले गईं। मुझे देखते ही मित्र बोला- क्या हुआ तुझे मैंने कहा कुछ नहीं यार! बस वह यमराज का इंतजार करने के चक्कर में अभी तक सुबह से भूखा बैठा हूँ। मेरी बात सुनकर डॉक्टर दोस्त ठहाका मारकर हँसा। श्रीमती जी का चेहरा और सवालिया हो गया। डॉक्टर बोला - "भाभी जी, हुआ ये कि सुबह-सुबह यमराज खुद मेरे क्लीनिक आ धमका। कहने लगा 'तेरे दोस्त के यहाँ नाश्ते का न्योता है, पर पहले तुझे चेक कर लूँ। कहीं उसके बीपी-शुगर की वजह से मेरा प्रोग्राम ही न बिगड़ जाए।'" मैं चौंका - "क्या? वो तो मेरे घर आया ही नहीं?" "नहीं भाई", डॉक्टर ने मेरी रिपोर्ट देखते हुए कहा, "वो सीधा मेरे पास आया। बोला - 'तेरा दोस्त मेरा इंतजार सुबह से भूखा बैठा है। जरा देख तो, कहीं इंतजार में ही ऊपर न आ जाए। फिर तो मेरा आना बेकार चला जाएगा।'" श्रीमती जी ने घूरकर मुझे देखा - "तो सुबह से भूखे बैठे हो, और यमराज से मिलने की इतनी जल्दी?" मैं झेंप गया - "अरे वो मित्र है अपना... जब कहता है आता हूँ, तो आता है। बस आज लेट हो गया।" डॉक्टर ने दवा लिखते हुए कहा - "सुन बे, यमराज का फोन आया था अभी। कह रहा था 'तेरे दोस्त को बोल दे, नाश्ता मैंने तेरे क्लिनिक पर ही कर लिया। उसके बीपी-शुगर देखकर मेरा पेट भर गया। अब मैं चलता हूँ। उससे कहना, अगली बार खा-पीकर मेरा इंतजार करे। भूखे पेट मैं किसी को नहीं ले जाता - मेरा भी उसूल है।'" हम तीनों हँस पड़े। श्रीमती जी बोलीं - "चलो, शुक्र है यमराज भी उसूलों वाला निकला। अब घर चलो, पहले खाना खाओ। इंतजार बाद में कर लेना।" मैं मन ही मन सोच रहा था - कभी-कभी इंतजार जान बचाता है, और कभी-कभी यमराज खुद इंतजार करवा कर जान बचा देता है। सुधीर श्रीवास्तव


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