विश्व रक्तदाता दिवस
विश्व रक्तदाता दिवस
विश्व रक्तदाता दिवस (१४ जून) ********* आज विश्व रक्तदाता दिवस हैं यह हम आप सब जानते हैं, पर विचारणीय है कि कितना इसका मान बढ़ाते हैं, रक्तदान की सार्थकता को कैसा आयाम देते हैं? रक्त की कमी से जाने कितने दम तोड़ देते हैं कितने परिवार बिखर जाते हैं कितनों के अपने पारिवारिक सदस्य माता-पिता, बेटी, बेटा संसार छोड़ जाते हैं कितनों के बुढ़ापे की लाठी टूट जाती है कितनी माँओं की गोद सूनी हो जाती है कितनी सुहागनों की माँग उजड़ जाती है। जाने कितने बच्चे अनाथ हो जाते हैं तो जाने कितने परिवारों के आधार ही बिखर जाते हैं। यह भी हम आप जानते हैं आये दिन देखते, सुनते, पढ़ते भी हैं अपने और अपनों को बचाने की खातिर रक्त की पूर्ति के लिए जी जान लगा देते हैं खुद ही नहीं परिवार के लोग, इष्ट-मित्र तक आगे बढ़कर रक्तदान भी करते हैं। मगर क्या हम विचार भी करते हैं जो असहाय हैं, रक्त की तलाश में निराश हो जाते हैं अपनों को अपने सामने दम तोड़ते देखने को विवश होते हैं। उनके लिए हम क्या कर सकते हैं? और क्या कुछ करते हैं? तर्क वितर्क कुतर्क छोड़िए और सब अपनी नैतिक जिम्मेदारी के प्रति गंभीर होइए रक्तदाता दिवस मनाएँ या बिल्कुल न मनाएँ, मगर रक्त को एक अटूट जन- आंदोलन बनाएँ सिर्फ एक दो दिवस नहीं, हर दिन अनवरत चलाएं। रक्त के अभाव में किसी एक के भी प्राण न जाने पाए हम सब मिलकर ये सौगंध उठाएँ। तभी आज के दिवस की सार्थकता होगी, जब किसी के प्राण रक्त के अभाव में नहीं छूटेंगे, तब हमारा-आपका ही नहीं राष्ट्र और समूचे विश्व का सिर ऊँचा उठेगा, जब रक्तदाता दिवस के अलावा भी रक्त का भंडार कहीं भी, कभी भी, हर जरुरतमंद के समय पर काम आयेगा किसी को नव प्राण देकर उसका घर परिवार बचायेगा, किसी के बुढ़ापे की लाठी नहीं टूटेगी किसी की गोद नहीं सूनी होगी किसी की माँग नहीं उजड़ेगी एक भी बच्चा अनाथ नहीं होगा किसी का आँगन सूना होने से बच जायेगा, तब ये विश्व रक्तदाता दिवस भी मुस्कराएगा अपनी सार्थकता पर इतराएगा हम सबका आभार धन्यवाद कर खुशी के गीत गायेगा। सुधीर श्रीवास्तव
