STORYMIRROR

Dashrathdan Gadhavi

Abstract

3  

Dashrathdan Gadhavi

Abstract

ये वफा हे मेरी..

ये वफा हे मेरी..

1 min
214

चले जाना है , यहां नही रहै ना,

माफ करना, गर कोइ खता हो मेरी। 


युं देखूं तो मुफलिस हूँ मैं , 

आपका प्यार ही बस मता है मेरी। 


एक रोज छोडकर जाउंगा आप को,

आप भी भुल जाना, ये रजा है मेरी। 


पता नही केसे भूल सकुंगा आपको, 

अभी से ही बस, ये व्यथा है मेरी।


खुशबु होता तो आप सब मे बिखर जाता,

पर, मानव हूँ ओर बहुत जफा है मेरी। 


एक बात याद रखना, दिल ना छोटा करना, 

मरकर भी साथ रहूँगा, ये वफा है मेरी। 



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract