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Madhavi Solanki

Abstract

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Madhavi Solanki

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ये बंधन है प्यार का ....

ये बंधन है प्यार का ....

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ये बंधन है प्यार का, ये त्यौहार है राखी का ..

ये बंधन है दो रिश्तों का, ये मिलन है भाई बहन का।

ये बंधन है बहन का, कभी ना वो रूठे ओर भूले ये त्यौहार,

और बखूबी ना भूले भाई की ये बंधन है दोनों का ..

ये बंधन है त्योहार का, लेकिन ये यादें है हर साल को फिर याद करने की,

ये एक ऐसा त्योहार है जहां हर कोई बचपन याद किया करते है,

आज भी वही नोक-झोंक लड़ाई रहती है दोनों के बीच,

और फिर रूठना, मनाना ..


ये प्यारा सा बंधन है, जिसमें हर कोई बंधना चाहता है,

जिसमें नाही कुछ पाना है नाही कुछ खोना हे,

बस पूरी जिंदगी यूं ही खुशी खुशी साथ जीना है ..

ये प्यारा सा बंधन ये जिसमें हर भाई बहन खुद को संजोना चाहते है,

दोनों ही जिंदगी में एक दूसरे की लंबी और खुशहाल जिंदगी की

कामना किया करते है

ये प्यारा सा बंधन है, जो हर साल एक धागे से जरूर बंधता है

पर निभाया जाता है दिल से और निखारा जाता है प्यार से, विश्वास से ...

ये प्यारा सा बंधन हे, ये दुनिया का सबसे अच्छा और सच्चा बंधन है

क्योंकि ये भाई और बहन का पवित्र बंधन है, ये बंधन है लाल धागे का,

और एक दूसरे की रक्षा का जिसका हर भाई बहन बेसब्री से इंतज़ार करते है हर साल ...

ये प्यारा सा बंधन है ...



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