STORYMIRROR

SHREYA BADGE

Romance

4  

SHREYA BADGE

Romance

यादें

यादें

1 min
397


याद आते हैं पुराने दिन अब भी 

मिलने आती हैं यादें अक्सर 

कैसे कहूँ तुम्हें कि 

वो अक्सर लाती है तुम्हें मेरे पास 

वो बात बात में तुम्हारा चिढ़ाना मुझे 

और 

औरों से मेरी खातिर लड़ जाना 

वो मेरा तुम्हें भाई जान पुकारने पे 

चिढ़ जाना और मेरा फिर भी 

तुम्हें यहीं कह के आवाज लगाना 


आज भी जब पहनती हूं गाउन मैं 

और उतरती हूं अपने घर की सीढ़ियां 

जाने कहाँ से आ जाते हो तुम 

ठीक मेरे पीछे 

की पहले आप उतरिए फिर हम उतरेंगे 

और मेरे पूछने पर 

वही चिढ़ा देना मुझे 

कि 

हम बाद में उतरेंगे तो 

सीढ़ियां साफ मिलेंगी 

आज भी कोई हक से समझाता है जब 

जाने क्यूँ उसके चेहरे में नजर आता है 

तुम्हारा ही मुस्कराता हुआ अक्स 


याद आती हैं मुझे आज भी 

वो तुम्हारा मुझसे बात करने से भी कतराना 

और बातें करने के बहाने ढूंढ के लाना 

याद आते हैं कि 

कैसे मेरे अज़ीब से डरावने सपनों का भी 

तुम कितना फनी मतलब निकालते थे 

हाँ ये भी है कि उसमे अपने मतलब कि 

बातें ही निकालते थे 

याद है ना तुम्हें भी 

कि कैसे तुम्हारा घर 

सपनों में घूम के आये थे 

और 

कैसे तुम्हें यकीन भी हो गया था 


मुझे तो याद आते हैं....

अक्सर वो पुराने दिन 

जब हम 

एक दूसरे के वकील हुआ करते थे 


आज भी अक्सर यादे तुम्हें मेरे पास लाती हैं

कभी हँसाती तो कभी आंखें नम कर जाती है.....



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance