याद
याद
आज फिर दिल दहल गया किसी की याद में,
बहते हुए आँसू रूक न सके बादल हों जैसे बरसात में।
सिसकियां रात भर आती रहीं,
किसी ने सुनी तक नहीं गम की अंधेरी रात में।
ख्वाब पूरे हों किसी के जरूरी नहीं,
छुपा कर रख लेता है, आसूं उम्र भर के बड़ी तादाद में।
कोई तोहफा समझ ले या गरूर किसी का,
आखिर निपट लेता है ताउम्र सरे बाजार में।
होती जब किसी की हुकूमत या राज,
कौन घूम सकता है, आजाद हो कर उसके राज में।
होता, है अफसोस बहुत, उनकी रहनुमाई पर,
जब तालियां बजाता है अपना ही यार सरे बाजार में।
क्यों करता है झगड़ा, इंसान सब कुछ जान कर भी सुदर्शन,
छोड़ कर जाना पड़ेगा सब कुछ इक दिन हर किसी को इस दर्द भरे संसार में।
