STORYMIRROR

Shalini Pandey

Romance

3  

Shalini Pandey

Romance

याद

याद

1 min
708

ना जाने वो कौन सा मोड़ था

जो तुम मुझे बेहिसाब याद रह गए

ज़हन के एक कोने में 

इत्मिनान से तुमने एक घर बना लिया

कभी मैं तुमसे ख़ुद मिलने चली आया करती थी, 

तो कभी तुम्हारी याद बुला लाती थी ।


ना तारीख़, ना मौसम, ना दिन , ना रात

ऐसा मुझे कुछ भी याद नहीं

पर मेरी तनहाइयों को बाँटने तुम

अक्सर ख़ुद ही चले आते थे

पूरा नहीं थोड़ा ही सही

बिलकुल तुम्हारे शब्दों की तरह।


तुम्हें पाने की

ऐसी कोई ख्वाहिश नहीं है ,

तुम्हें, तुम्हारे शब्दों को

‘शालीन’ हो के जी सकूँ ,

ऐसा ऐतबार ज़रूर किया है ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Shalini Pandey

याद

याद

1 min पढ़ें

Similar hindi poem from Romance