STORYMIRROR

Madhu Vashishta

Inspirational

4  

Madhu Vashishta

Inspirational

व्यथा भार

व्यथा भार

1 min
10

जब बन जाती है व्यथा भार जन जीवन में।

कुछ भी तो सूझता नहीं ,

आती नहीं कोई भी सुखद याद मन में।


घेर लेती है जब उदासियां और तनहाइयां मन को,

तब अच्छा कुछ नहीं लगता

भले ही बैठे हों उपवन में।


तब व्यथा के भार को हटाने की सोचो। 

कोई भी हो उलझन सुलझाने की सोचो। 


जैसे हर शब्द का अर्थ जरूर होता है। 

ऐसे ही हर समस्या का समाधान भी कहीं होता है। 


विश्वास करके परमात्मा का अपने कर्तव्य पथ पर बढ़ जाने की सोचो। 

कारण समझ कर व्यथा का मुस्कुराने की सोचो। 


खुद को मुक्त करो पुरानी यादों पुराने जीवन से, 

जीवन को नए सिरे से चलाने की सोचो।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational