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Rekha gupta

Abstract

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Rekha gupta

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वतन के वास्ते

वतन के वास्ते

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ये धर्म जाति के नाम पर झगड़ते क्यों हो

मंदिर मस्जिद के नाम पर भटके क्यों हो 

आन बान और शान बस वतन हो 

दिल में देशप्रेम की रवानगी हो। 

वतन के वास्ते दीवानगी रखो 

तो कोई बात बने।


अनेकता में एकता को निस्तेज न होने दो

वतन के नवरंग को नव तरुणाई दो 

धन्य मानो और वतन पर अभिमानी हो

माँ भारती के कण कण का सम्मान करो ।

वतन के वास्ते दीवानगी रखो तो कोई बात बने। 


आकाश से पाताल तक वतन की जय हो

तिरंगे के वास्ते दिल में जूनून औ जोश हो

श्रद्धा के भाव से झुककर शीश नमन हो

एक स्वर में राष्ट्र गान का प्रिय वंदन हो ।

तिरंगे के लिए दीवानगी रखो तो कोई बात बने। 


होली दीवाली ईद सब मिलकर मनाओ

खुश रहोसबके चेहरे पर मुस्कराहट लाओ

जन जन के लिए दिल में मंगलकामना हो

सबके सुख दुख साथ बांट कर चलो।

इंसान हो इंसानियत के लिए

दीवानगी रखो तो कोई बात बने। 


असंभव को संभव करने की बात हो

मुश्किलों से लड़ने का मन में जज्बा हो

दुनिया के नक्शे में भारत शीर्ष पर हो

हर भारतीय की जुबां पर देशभक्ति का राग हो। 


देशप्रेम के लिए दीवानगी जगाओ

तो कोई बात बने। 

हम हिन्दुस्तानी हैं इस पर गर्व करो 

तो कोई बात बने। 


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