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Anil Jaswal

Abstract

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Anil Jaswal

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वसुधैव कुटुंबकम्।

वसुधैव कुटुंबकम्।

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ये है संस्कृत का श्लोक,

जो है हिन्दी की माता,

है चिन्हित भारत के सबसे बड़े मंदिर के प्रवेशद्वार पे,

यनि संसद भवन पे।

वसुधा का अर्थ पृथ्वी,

और कुटुम्ब का अर्थ परिवार,

यनि सारी पृथ्वी एक परिवार सम्मान,

ये है भारतीय संस्कृति की पहचान,

अथार्त! जो भी करें,

पहले सारे विश्व को ध्यान में रखें,

सबसे मेलजोल करके,

प्रेम और मोहब्बत का पैगाम देके,

सारा विश्व एक परिवार के माफ्क व्यवहार करें।

जो कमजोर,

उसकी मदद को आएं,

रंगभेद, नस्लवाद, आतंकवाद, हिंसा, जातिवाद,

का डट कर करें विरोध,

हर किसी का करें सम्मान,

विश्व को बनाएं स्वर्ग के सम्मान।

भारत ही ऐसा देश,

जहां अनेकता में एकता का परिवेश,

यहां जो भी आया,

हमने उसे सहज भाव से अपनाया,

"वसुधैव कुटुंबकम्" का उदाहरण दिखाया।



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