वरदान ?
वरदान ?
बोला चंदा धरती से
ढक लिया क्यों चेहरा बहना !
शरमा रही क्या तुम
या चाह रही नहीं कुछ भी कहना !
बोली धरती - भइया प्यारे
चुप्पी मेरी तुम समझ सके ना
बच्चे जो थे जां से प्यारे मुझको
चाक कर दिया उन्होंने मेरा सीना !
सूरज बोला लॉकडाउन है
आ रहा मुझे मज़ा बहुत है
देखो पहुंच रहीं तुम तक निर्बाध
किरणों की गर्माहट मेरी
हरियाली कर रही नर्तन
बादल भी कर रहे ठिठोली |
गंगा का जल साफ हो गया
ज्यों मानव का पाप माफ हो गया
कोरोना ने कहर बरपाया है
या यह छुपा हुआ वरदान हो गया !
