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Prashant Bebaar

Abstract


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Prashant Bebaar

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वक़्त बड़ा मद्धम सरक रहा है

वक़्त बड़ा मद्धम सरक रहा है

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वक़्त बड़ा मद्धम सरक रहा है

मैं अपनी रफ़्तार बढ़ा रहा हूँ

यहाँ तुझे भूलने की कोशिश में

मैं वहाँ और याद आ रहा हूँ ।



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