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Diwa Shanker Saraswat

Abstract

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Diwa Shanker Saraswat

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वो मुझे छोड़कर चली गयी

वो मुझे छोड़कर चली गयी

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यह तो जिंदगी है

कुछ आते हैं तो कुछ जाते हैं

सब छोड़कर जाते हैं

फिर क्या विषय

वह मुझे छोड़कर चली गयी


मैं उसे छोड़कर चल दिया

वैमनस्य बढाते कदमताल करते

ईर्ष्या और नफरत के उवाल भरते

जल जलकर भुनते रहते

फिर भी साथ साथ चलते

नहीं यह तो साथ नहीं


साथ तो मन का

साथ विचारों का

साथ है धर्म का

अधर्म का कोई साथ नहीं


सब अकेले आते हैं

अकेले जाते हैं

मुझे कोई गम नहीं

वो मुझे छोड़कर चली गयी।


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