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NANDU VISTAR

Romance

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NANDU VISTAR

Romance

वो लम्हें (नन्दू विस्तार)

वो लम्हें (नन्दू विस्तार)

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क़ुर्बान मुझे तू कर गयी

 शहादत मुझे नसीब न हुई

एक तुझे ही तो चाहा था

इस ज़माने में और किस्मत देख

मेरी तू भी मेरी न हुई


ज़ख्म नासूर ही बनेंगे तुझे

फिर से पाने से

फिर पता नहीं क्यूँ

दिल मिलना चाहता है

तुझसे किसी न किसी बहाने से


हर तरफ चारों ओर लगे हुस्न के मेले हैं

हम तुझे पाकर भी तन्हा थे

और आज इस भीड़ में भी अकेले हैं



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