Sandeep Sharma
Action
वक्त ने वक्त से कहा
मेरे साथ रहेगा तो
नहीं छीनेंगी रोटियां।
वयं रक्षाम् व...
दीप
सपने
बुजुर्ग
परिश्रम
तानाशाही
ताकत
सरस्वती मंदिर
पर्यटन
प्रेम
छाए गगन में इतना ही बरसो. बरखा रानी जरा थम के बरसो। छाए गगन में इतना ही बरसो. बरखा रानी जरा थम के बरसो।
नादान था ,मासूम था, बेचारा , उसके दोगले पन को न समझ सका । नादान था ,मासूम था, बेचारा , उसके दोगले पन को न समझ सका ।
कई त्योहार बाकी थे मगर सिर्फ़ हमारी कब्र पर ही शानदार सजावट हुई।। कई त्योहार बाकी थे मगर सिर्फ़ हमारी कब्र पर ही शानदार सजावट हुई।।
अनार और अमरूद के फल अभी भी उतने ही पाता हूं। अनार और अमरूद के फल अभी भी उतने ही पाता हूं।
माता-पिता उन दिल के टुकड़ों को समेट कर फिर भी दिल के टुकड़ों के साथ ही रहते हैं। माता-पिता उन दिल के टुकड़ों को समेट कर फिर भी दिल के टुकड़ों के साथ ही रहते ...
जब तू अपने रास्ते पर अकेला चलना सीख जाएगा तब मुड़कर देखना कारवां खुद ही तेरे पीछे आएगा जब तू अपने रास्ते पर अकेला चलना सीख जाएगा तब मुड़कर देखना कारवां खुद ही तेरे ...
स्वर्गीय सुंदरता की कहानी, कविता के रूप में व्यक्त हो गईं। स्वर्गीय सुंदरता की कहानी, कविता के रूप में व्यक्त हो गईं।
सच्चे प्रेम में केवल समर्पण है होता। बस वह केवल प्रेमी की खुशी के लिए ही है जीता। सच्चे प्रेम में केवल समर्पण है होता। बस वह केवल प्रेमी की खुशी के लिए ही है ...
कहीं इस अतिवृष्टि का कारण ही तो नहीं इंसान बना है? कहीं इस अतिवृष्टि का कारण ही तो नहीं इंसान बना है?
कभी-कभी उसमें से एक दो पन्ने निकाल कर देख लेते हैं। कभी-कभी उसमें से एक दो पन्ने निकाल कर देख लेते हैं।
मुश्किलों पर विजय पाते हैं साहस से पहाड़, समुद्र भी लाँघ लिए जाते हैं साहस से। मुश्किलों पर विजय पाते हैं साहस से पहाड़, समुद्र भी लाँघ लिए जाते हैं साहस से...
म सबको लगता है ये कितना प्यारा, इसीलिए तो हैं शायद राष्ट्रीय पक्षी हमारा। म सबको लगता है ये कितना प्यारा, इसीलिए तो हैं शायद राष्ट्रीय पक्षी हमारा।
कुछ और मिले, मिले ना मिले, पर मन को सहज शांति और संतुष्टि निश्चित ही मिल जाएगी। कुछ और मिले, मिले ना मिले, पर मन को सहज शांति और संतुष्टि निश्चित ही मिल जाए...
उसने कहा, जो भी दे सकते हो सब लिख दो मेरे नाम, मैंने, तेरे नाम अपनी ज़िंदगी लिख दी। उसने कहा, जो भी दे सकते हो सब लिख दो मेरे नाम, मैंने, तेरे नाम अपनी ज़िंदगी ल...
आज इस मोबाइल के चक्कर में बच्चे भी पढ़ नहीं पाते हैं। आज इस मोबाइल के चक्कर में बच्चे भी पढ़ नहीं पाते हैं।
धन्य है आपका सार्थक प्रयास ! धन्य है आपका कर्मयोग ! धन्य है आपका सार्थक प्रयास ! धन्य है आपका कर्मयोग !
घर की परंपरा को आगे बढ़ाएगी बहुरानी घर की परंपरा को आगे बढ़ाएगी बहुरानी
कहाँ भागते समर भूमी से अभी सांझ नहीं हुई ठहर जरा कि क्षत्राणियां अभी बांझ नहीं हुई।। कहाँ भागते समर भूमी से अभी सांझ नहीं हुई ठहर जरा कि क्षत्राणियां अभी बांझ नह...
उनके कारण ही तो एक दिन सफल मैं होने पाऊंगा। उनके कारण ही तो एक दिन सफल मैं होने पाऊंगा।
उसके बदले में चुनते हैं झूठी शान , काला धन और बेबुनियादी परंपराएं। उसके बदले में चुनते हैं झूठी शान , काला धन और बेबुनियादी परंपराएं।