वक्त इतना बदल जायेगा भान नहीं
वक्त इतना बदल जायेगा भान नहीं
कुछ ऐसा हो जायेगा अनुमान नहीं था
वक्त इतना बदल जायेगा भान नही था।
मेरे बिना कटती नही थी जिनकी जिंदगी
वे ही किनारा कर लेंगे अनुमान नहीं था।
वक्त ने मुझसे आँख मिचौली क्या कर ली
इस तरह नकाब खुल जायेगा अंदाज नहीं था।
अच्छा ही हुआ जो वक्त ने सीखा दिया
वरना इतना बेरहम इंसान नहीं था।
बहुत कोशिश की मैंने भी रंग बदलने की
पर उनकी तरह बदलना आसान नहीं था।
हमेशा ही कोशिश की रिश्ता दिल से निभाने की
कभी अपने फर्ज का गुमान नहीं था।
हो जाती है गलतियाँ मुझसे भी
वरना लोग हमसे रूठे ये अरमान नहीं था।
अपनत्व के हक जताने वालों से हार जाते हैं हम
वरना गुलामी करना कोई फरमान नहीं था।
अनसुनी करके चलती रही अपनी राहों पर
घुट घुट कर मंजिल तक पहुँचना कोई काम नहीं था।
