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Manoj Sharma

Tragedy


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Manoj Sharma

Tragedy


विवशता

विवशता

1 min 247 1 min 247

गाँव फ़ोन नहीं कर सकता,

फिर भी कभी-कभार बात करता है।

हम दोनों घंटों, मुंदी आँखों से एक दूसरे को देखते रहते ।


वह सहसा ही मौन तोड़ता,

और पूछता कब आओगे?

मैं कोई उत्तर नहीं दे पाता, ना ही उसकी काॅल काट पाता ।


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