विश्व राज़
विश्व राज़
लाल गोल सूर्य शाम
अस्न गिरि चूमता ।
जलधि रात भी सदा
शुभ्र लहर फेंकता ।
तीव्र झोंके से पवन ,
नीड़ को भी तोड़ता ।
अनन्त शक्ति विश्व का
रहस्य है यह क्या रहा !
जंगलों के भीतिमय
अंतराल को भेदकर
झींगुरों की शोर से ,
झनकने का अर्थ क्या ?
अचल अटल शीश से
शुद्ध नीर उतारकर
कालचक्र जीतकर
गिरिपहाड़ क्यों खडा
नील विशद गगन से
गडगडाकर मेघजाल
पृथ्वीतल के जीव को
नित्य डराता है क्यों ?
सचेत बलवान मानव हो
पंख बिछाती मोरनी हो
विश्व राज्य में बेफ़िक्रे
विराजने का राज़ क्या !
