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Pinki Khandelwal

Inspirational

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Pinki Khandelwal

Inspirational

विघार्थियों के जीवन की कड़वी सच्चाई...।

विघार्थियों के जीवन की कड़वी सच्चाई...।

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हर विघार्थी पास होना चाहता है,

पर क्या ये संभव है?

हर विघार्थी टीचर का फेवरेट स्टूडेंट्स बनना चाहता है,

पर क्या ये संभव है?

शायद नहीं ....,


पर हां...

 आपकी मेहनत और शिष्य का गुरु के प्रति सम्मान,

एक दिन जरूर इस असंभव को संभव बना सकता है,


याद रखना,

 स्कूल की पहचान अच्छे विघार्थियों से होती है,

 न कि वहां पर मौजूद सुख सुविधाओं से,


और सोचो,

पहले विघालय नहीं थे तब भी बच्चे पढ़ते थे,

उन्हें वहीं ज्ञान और शिक्षा मिला करती थी,

जो आज के बच्चों को मिलती है,

और वो गुरु का सम्मान करना भी जानते थे,

क्योंकि उस समय गुरु से दीक्षा पाना आसान नहीं था,

उस समय शिक्षा का मोल अधिक था,

और दीक्षा पाने के लिए उन्हें कठिन परिश्रम करना पड़ता था,

जंगल से लकड़ी काटना जैसे अनेकों काम करने पड़ते थे,

शिष्टाचार और अनुशासन में रहना पड़ता था,

नहीं तो उन्हें कड़ा दण्ड दिया जाता था,


पर आज.. विघार्थियों के पास सारी सुख सुविधाएं है,

फिर भी बच्चे पढ़ाई का मोल नहीं समझते,

 गुरु का सम्मान नही करते हैं,


क्योंकि उन्हें बस अच्छे स्कूल और कॉलेज से मतलब है,

विघा का उनके नजर में कोई मोल नहीं है,

और यही आज के युग का कड़वा सच है।



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