वह कौन है
वह कौन है
वह कौन है
जो सुन लेता है
कही अनकही मेरी
वह कौन है जो
देखता प्रतिपल
हर संघर्ष की घड़ी मेरी।
शायद जानता व्यर्थ ही हो
रही मैं दुखी
क्योंकि
बुने हैं उसने
कुछ ताने-बाने
उसके जो समय
पर हैं आने।
धन्य हो तुम
धन्य तुम्हारा गणित
पर संयम कहां इतना
जो समझे
लेखा-जोखा तेरा अपरिमित
यह कौन है जो समझ लेता
वह कौन है जो सुन लेता है
कही अनकही मेरी।
तीखे पर मीठी का स्वाद ही अलग
ना हो तीखा तो मीठा भी व्यर्थ
यही है विडंबना यही है वह चक्र
धरा की तरह घूमता
हमारा भी भाग्य चक्र
और जिसे घुमा रहा है
बैठा छिपा कहीं अनंत।
वह कौन है जो सुन लेता
कही अनकही
कहीं-कहीं देता आभास
कभी छीन लेता एहसास
खेलता जो सबसे है
वह कौन है वह कौन है।
