जीवन की साँझ
जीवन की साँझ
जीवन के रंग अजीब हैं
ना कोई सभी साथी
ना कोई मन मीत है
अपने खिलाए पुष्पों को
देखना व खिलखिलाना।
जीवन की बस अब यही रीत है
जीवन के रंग अजीब हैं
ना कोई संगी साथी
ना कोई मनमीत है।
यह जीवन की सांझ है
जिसकी मधुर कोई स्मृति नहीं
तप के तप से तप तप कर
तपते ह्रदय को आद्र नहीं
तप को तेज बना कर ही
हो सकती यहां कुछ जीत नहीं
जीना अब यही रीत है।
जीवन के रंग अजीब है
ना कोई संगी साथी
ना कोई मनमीत है।
जीवन है मार्ग कंटक भरा
हठयोगी बन है जीत तभी
है जीत तभी
जीवन के रंग अजीब हैं
ना कोई संगी साथी
ना कोई मनमीत है।
स्व को स्व से प्रेरित कर
इस कल को कल तक ढोना है
प्रेरणा का इंधन भर
सपना अपनों का सजोना है।
अपने तन मन धन से
उनमें रंग पिरोना है
उनमें रंग पिरोना है,
बस अब यही रीत है
ना कोई संगी साथी
ना कोई मनमीत है।
बस इतना कर दो हे प्रभु
करूं दूर किसी का संताप
हर सकूं किसी का ताप
सार्थक करूं इस जीवन को
एक मुस्कुराहट दे पाऊं किसी को
जीवन के रंग अजीब है।
न कोई संगी साथी
न कोई मनमीत है,
न कोई संगी साथी
न कोई मनमीत है।
