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बेज़ुबानशायर 143

Abstract Children Stories Inspirational

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बेज़ुबानशायर 143

Abstract Children Stories Inspirational

वादे निभाने की

वादे निभाने की

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मोहब्बत के वो वादे मुझे तुमसे निभाने की रुत है।

यही तो तेरे और मेरे भी नशेमन सजाने की रुत है ।


ख़िज़ाएं बहारों में ढलने लगी हैं ये शाम ।

फ़िज़ाएं भी करवट बदलने लगी हैं ये रात ।


न यूं दूर जाओ कभी मेरी निगाहें चुरा कर ।

यही तो तुमसे मेरी निगाहेँ मिलाने रुत है।


गुलाबों का शाख़ों पे हिलना तो देखो तुम ।

ये शाख़ों से शाख़ों का मिलना तो देखो तुम ।


ज़रा पास आ कर गले तो लगा लो मुझे भी ।

यही तो तेरे और मेरे दिलों को मिलाने की रुत है।


ये हवा महकी-महकी और ये घटा भी बहकी-बहकी सी है ।

आतिश-ए-इ़श्क़ मेरी और तेरी भी अभी दहकी-दहकी सी है ।


कहां जा रहे हो यहां आओ मेरे वो दिलबर।

यही तो तेरे और मेरे दिल-ओ-जान यु लुटाने की रुत है।


 मोहब्बत के वो वादे मुझे तुमसे निभाने की रुत है।

यही तो तेरे और मेरे भी नशेमन सजाने की रुत है ।


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