ऊर्जा
ऊर्जा
ऊर्जा
चाहिये, हमें जीने के लिये॥
कभी ग़ायब हुई
तो हम कितने विवश होंगे
कभी सोचा नहीं॥
यूँ तो हम नित्य प्रति
नये श्रोत ढूँढने में
क़ायम रहे हैं॥
पानी, कोयला भाप
डीज़ल पैट्रोल
परमाणु पानी
बायो या हाइड्रोजन॥
श्रोत कितने ही हो
अन्त और उपयोग सब समान है.
पानी की तरह॥
जीवन शैली की ऊर्जा ये है तो
जीवन चलने की भी
एक निहित ऊर्जा है
मन दाना और पानी
सदैव से॥
इससे ज़्यादा कुछ नहीं॥
क्या कभी लौटेगें हम
… जहां से चले थे,
या मिट जायेंगें
उस रस्सा कसी में॥
उठते बढ़ते
क्या कभी विस्तार विकास
पर
सीमित आनन्द हावी होगा
क्या पता?
