STORYMIRROR

Lata Singhai

Inspirational

4  

Lata Singhai

Inspirational

ऊंचे कद

ऊंचे कद

1 min
424


ऊँची ऊँची महल अटारी 

ऊँचे पद और ऊँचे नाम 

ऊँचाई पर होता है बस 

एकाकीपन और अभिमान 

हिमगिरी पर होती ऊँचाई 

और ठंडेपन का एहसास 

पाँव तले ना दूब उगती 

ना जीवन का कोई प्रमाण 


        जल जीवन देता है लेकिन 

        ऊँचाई पर जम जाता 

        जीवन और सूनेपन का 

        देखो ये कैसा नाता 

        हिमगिरी पर गिरी बूँद भी

        अपनी किस्मत पर रोती है 

        इठलाती नदियाँ में मिलती 

        कलकल करती बहती मै


ऊँचे ऊँचे सघन पेड़ जब 

फैलाते अपनी बांहे 

पाँव तले तब दूब उगती 

नन्ही कलियाँ मुस्काये 

कलरव करते पँछी मिलते 

थका पथिक भी ले विश्राम 

पवन सुगंधित कर देती है 

उस पल जीवन के आयाम 


         ऊंचाई संग विस्तारित मन 

         जीवन को सुगंधित करता है 

         जैसे पारस को छूने से

         लोहा सोना बनता है 

         शिखरों के वंदन करने से 

         मिलता ना हमें कोई भगवान 

        दुखियों के आँसू पोछे तो 

        बन जाते स्वयं भगवान 


है प्रभु 

ऊँचे कद में ना देना 

तुम कोई ऐसा बौनापन 

आसमान को छूते छूते 

छुटे ना मेरा आँगन

है प्रभु दे दो अगर ऊँचाई 

तो संग देना ऐसा मन 

गैरो के संग चलते चलते 

अपनो को ले चलू में संग। 



ଏହି ବିଷୟବସ୍ତୁକୁ ମୂଲ୍ୟାଙ୍କନ କରନ୍ତୁ
ଲଗ୍ ଇନ୍

Similar hindi poem from Inspirational