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S.Dayal Singh

Abstract

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S.Dayal Singh

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उम्र यूं ही गुज़र गई

उम्र यूं ही गुज़र गई

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**उम्र यूं ही गुज़र गई**
कुछ उम्र गुज़र गई
खेलने और खेलाने में
कुछ उम्र गुज़र गई
हंसने और हंसाने में
कुछ उम्र गुज़र गई
रूठने और रूठाने में 
कुछ उम्र गुज़र गई
मानने और मनाने में
कुछ उम्र गुज़र गई
पढ़ने और पढ़ाने में
कुछ उम्र गुज़र गई
बचने और बचाने में
कुछ उम्र गुज़र गई 
पूछने और पूछाने में
कुछ उम्र गुज़र गई
सजने और सजाने में
कुछ उम्र गुज़र गई 
डरने और डराने में
कुछ उम्र गुज़र गई 
पकने और पकाने में
कुछ उम्र गुज़र गई 
खाने और खिलाने में
कुछ उम्र गुज़र गई 
बनने और बनाने में
कुछ उम्र गुज़र गई 
ठगने और ठगाने में
कुछ उम्र  गुज़र गई
लूटने और लुटाने में
कुछ उम्र गुज़र गई
आशियाना बसाने में 
कुछ उम्र गुजर गई 
घर को सजाने में
कुछ उम्र गुज़र गई
खुशियां मनाने में
कुछ उम्र गुज़र गई 
सतने और सताने में
कुछ उम्र गुज़र गई 
जागने और जगाने में
कुछ उम्र गुज़र गई
समझने और समझाने में
उम्र के लिये कितनी
ऊमर बची ? सोचा ही नहीं
यूं ही उम्र निकल गई
हिसाब-किताब लगाने में।
--एस.दयाल सिंह--


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