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Gurudeen Verma

Abstract

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Gurudeen Verma

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उसी ने हाल यह किया

उसी ने हाल यह किया

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जिससे उम्मीद थी ज्यादा, उसी ने हाल यह किया।

गुनाह करके भी उसने तो, हवाले-कैद मुझे किया।।

जिससे उम्मीद थी ज्यादा----------------।।


दिल का खिलौना मुझको बनाकर, मुझसे खेला बहुत।

पाकर फिर धनवान दोस्त, उसने किनारा मुझसे किया।।

जिससे उम्मीद थी ज्यादा----------------।।


छोड़ दिया था मैंने तो, उसके लिए सच में अपना घर।

महल बनाकर मेरे खूं से, अश्कदान उसने मुझे किया।।

जिससे उम्मीद थी ज्यादा---------------।।


मालूम था उसको यह भी, रह नहीं सकता उससे दूर।

मेहन्दी लगाकर हाथों में , जनाजा मेरा विदा किया।।

जिससे उम्मीद थी ज्यादा----------------।।


शौक बहुत था उसको तो, मुझसे नजरें मिलाने का।

कर दिये खाक मेरे अरमान, मुझको बदनाम किया।।

जिससे उम्मीद थी ज्यादा-----------------।।


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