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V. Aaradhyaa

Inspirational

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V. Aaradhyaa

Inspirational

उन्मुक्त गगन चाहिए

उन्मुक्त गगन चाहिए

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समाज की दृढ़ सुव्यवस्था का आधार 

उज्ज्वलचरित्र के इंसान पर होता निर्भर!

सुख-शान्ति और सन्तोष की है परिणति

जो नेक व्यक्तियों के सदाचार से है बनती!


प्रेम स्नेह मैत्री दया धैर्य व आत्मीयता

स्वतंत्रता का वातावरण जहां कहीं रहेगा!

वहाँ कोई भी पिंजरा में रहना नहीं चाहेगा 

खग या मनु स्वभावत:अंकुश नहीं चाहेगा!


बंधन में रहकर कहाँ किसी को ख़ुशी मिलती है 

बदलाव की प्रक्रिया तो निरन्तर चलती रहती है!

तभी तो कोटर में रहनेवाली छोटी सी चिड़िया

व्यस्क होते ही पेड़ की ऊँची फुनगी पे बैठती है!


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