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Manisha Kumar

Inspirational

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Manisha Kumar

Inspirational

उड़ान

उड़ान

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कलम को थाम कर।  

भरी है उड़ान

 डर है भटक न जाऐ

अभी परिंदा है नादान


धीरे धीरे पंख फैलाकर

अब तो तुझको उडना है

शब्दों के सागर से

गहरे जाकर मोती चुनना है


उम्मीदों की डोर पकड़ कर

ऊँचे उड़ते जाना है

तारों को गर छूना है तो

पूरा जोर लगाना है


लोग मिलेंगे लाखों ऐसे

पकड़ के नीचे खीचेंगे

फिर भी कुछ ऐसे भी होंगे

प्यार से अपने सीचेंगे


लगे कभी जो हार रहा है

हिम्मत नई जुटानी होगी

हर दिल को छूले गहरे तक


ऐसी छवि बनानी होगी

सफर बहुत है मुश्किल 

फिर भी हिम्मत

तुझे दिखानी होगी।


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