त्यौहार
त्यौहार
त्यौहार का अभिप्राय है त्यो +हार =तुम्हारी हार,
क्योंकि प्रत्येक जीत से पहले हार के नियम में बंधा है पूरा संसार.
यूँ तो प्रत्येक त्यौहार दर्शाता बुराई की हार,
पर आसान नहीँ इस कलयुग में खत्म करना अत्याचार.
हर व्यक्ति कभी ना कभी सहन करता दुराचार व अपमान,
कभी सामाजिक बाधाओं तो कभी मानसिक दवाब के चलते आवाज़ उठाना नहीं होता आसान.
आवश्यक है कि एक सुलभ व सकल संसार सजाएं हम अब,
सुनिश्चित कर पाएंगे सबके हित की रक्षा हम तब.
दुखी ना होगा जब कोई,सुखी बसेगा संसार सभी,
वास्तव में त्यौहार का मतलब सार्थक होगा तभी.
दिवाली का जश्न, पटाखों की गूँज सार्थक होंगी ऐसे माहौल में,
झूम उठेंगे अंतर्मन से सब,शेष रहेगा ना कोई अवसाद ह्रदय में.
दिए जल उठेंगे जब मन में तब वास्तव में अंधेरा छट जाएगा,
बाहरी दियों और मोमबत्तियों का ना कोई मोल रह जाएगा.
रंगीन होगी ज़िन्दगी सभी तो रोज़ मनाई जायेगी होली,
गुलाल की लालिमा फीकी पड़ जायेगी देख के चहकते गालों की लाली.
ईद का चाँद फीका पड़ जाएगा ऐसी होगी चेहरों की चमक,
गुरुपर्व रोज़ मनाया जाएगा, इस कदर प्रभावशाली होगी ह्रदय में विद्यमान रौनक और रमक.
