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Shailaja Bhattad

Abstract

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Shailaja Bhattad

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तुरपाई

तुरपाई

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थमी सी लगती है

लेकिन थमी है कहां?

तुरपाई में व्यस्त है,

जिंदगी यहां।

उधड़ सी गई थी

जो यहां-वहां ।


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